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________________ गा० ६९] कषायोपयोगकाल-अल्पबद्धत्व-निरूपण ५६३ साहिया । २३. देवगदीए जहणिया माणद्धा संखेज्जगुणा । २४ णिरयगदीए जहणिया मायद्धा विसेमाहिया । २५. णिरयगदीए जहणिया माणद्धा संखेज्जगुणा । २६. देवगदीए जहणिया मायद्धा विसेसाहिया । २७ मणुस-तिरिक्खजोणियाणं जहणिया माणद्धा संखेज्जगुणा । २८.मणुसतिरिक्खजोणियाणं जहणिया कोधद्धा विसेमाहिया । २९. मणुस-तिरिक्खजोणियाणं जहणिया मायद्धा विसेसाहि या । ३०, मणुस-तिरिक्खजोणियाणं जहणिया लोहद्धा विसेसाहिया । ३१. णिरयगदीए जहणिया कोधद्धा संखेजगुणा । ३२. देवगदीए जहणिया लोभद्धा विसेसाहिया । ३३.णिरयगदीए उक्कस्सिया लोभद्धा संखेज्जगुणा । ३४. देवगदीए उक्कस्सिया कोधद्धा विसेसाहिया । ३५. देवगदीए उक्कस्सिया माणद्धा संखेज्जगुणा । ३६. णिरयगदीए उकस्सिया मायद्धा विसेसाहिया । ३७ णिरयगदीए उक्कस्सिया माणद्धा संखेज्जगुणा । ३८. देवगदीए उक्कस्सिया मायद्धा विसेसा हिया । ३९. मणुम-तिरिक्खजोणियाणमुक्कस्सिया माणद्धा सखेज्जगुणा । ४०. तेसिं म्भव है। देवगतिमे क्रोधका जघन्य काल नरकगतिके जघन्य लोभ-कालसे विशेष अधिक है। देवगतिमें मानका जघन्यकाल देवगतिके जघन्य क्रोधकालसे संख्यातगुणा है। नरकगतिमें मायाका जघन्यकाल देवगतिके जघन्य मानकालसे विशेष अधिक है। नरकगतिमें मानका जघन्यकाल नरकगतिके ही जघन्य मायाकालसे संख्यातगुणा है। देवगतिमें मायाका जघन्यकाल नरकगतिके जघन्य मानकालसे विशेष अधिक है ॥२०-२६॥ चूर्णिसू०-मनुष्य और तिर्यंच योनिवाले जीवोके मानका जघन्यकाल देवगतिके जघन्य मायाकालसे संख्यातगुणा है। उन ही मनुष्य और तिर्यंच योनियोके क्रोधका जघन्यकाल उन्हींके जघन्य मानकालसे विशेष अधिक है। मनुष्य और तिर्यंच योनियोके मायाका जघन्यकाल उन्हींके जघन्य क्रोधकालसे विशेष अधिक है। मनुष्य और तिर्यंच योनियोंके लोभका जघन्यकाल उन्हीके जघन्य मायाकालसे विशेष अधिक है ॥२७-३०॥ चूर्णिसू०-नरकगतिमे क्रोधका जघन्यकाल मनुष्य और तिर्यंचयोनियोके जघन्य लोभकालसे संख्यातगुणा है। देवगतिमें लोभका जघन्यकाल नरकगतिके जघन्य क्रोधकालसे विशेष अधिक है। नरकगतिमें लोभका उत्कृष्टकाल देवगतिके जघन्य लोभकालसे संख्यातगुणा है । देवगतिमे क्रोधका उत्कृष्टकाल नरकगतिके उत्कृष्ट लोभकालसे विशेष अधिक है। देवगतिमे मानका उत्कृष्ट काल देवगतिके ही उत्कृष्ट क्रोधकालसे संख्यातगुणा है। नरकगतिमे मायाका उत्कृष्टकाल देवगतिके उत्कृष्ट मानकालसे विशेष अधिक है। नरकगतिमें मानका उत्कृष्टकाल नरकगतिके ही उत्कृष्ट मायाकालसे संख्यातगुणा है। देवगतिमें मायाका उत्कृष्टकाल नरकगतिके उत्कृष्ट मानकालसे विशेष अधिक है ॥३१-३८॥ चूर्णिस०-मनुष्य और तिर्यंचयोनियोके मानका उत्कृष्टकाल देवगतिके उत्कृष्ट माया
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
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