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________________ ५२२ कसाय पाहुड सुत्त [६ वेदक-अर्थाधिकार हियावलियचरिमसमयसकसायस्स । ४०४. इत्थिवेदस्स उक्कस्सिया पदेसुदीरणा कस्स ? ४०५ खवगस्स समयाहियावलियचरिमसमयइत्थिवेदगस्स । ४०६. पुरिसवेदस्स उक्कस्सिया पदेसुदीरणा कस्स ? ४०७. खवगस्स समयाहियावलियचरिमसमयपुरिसवेदगस्स । ४०८ णवंसयवेदस्स उक्कस्सिया पदेसुदीरणा कस्स ? ४०९. खवगस्स समयाहियावलियचरिमसमयणqसयवेदगस्स । ४१०. छण्णोकसायाणमुक्कस्सिया पदेसुदीरणा कस्स १ ४११. खवगस्स चरिमसमयअपुबकरणे वट्टमाणगस्स । ४१२. जहण्णसामित्तं । ४१३. मिच्छत्तस्स जहणिया पदेसुदीरणा कस्स ? ४१४. सण्णिमिच्छाइद्विस्स उकस्ससंकिलिट्ठस्स ईसिमज्झिमपरिणामस्स वा । ४१५. सम्मत्तस्स जहणिया पदेसुदीरणा कस्स ? ४१६ मिच्छत्ताहिमुहचरिमसमयसम्माइद्विस्स समाधान-समयाधिक आवली कालवाले चरमसमयवर्ती सकपाय (दशमगुणस्थानी) क्षपकके होती है ॥४०३॥ शंका-स्त्रीवेदकी उत्कृष्ट प्रदेश-उदीरणा किसके होती है ? ॥४०४॥ समाधान-समयाधिक आवली कालवाले चरमसमयवर्ती स्त्रीवेदका वेदन करनेवाले क्षपकके होती है ॥४०५॥ • शंका-पुरुषवेदकी उत्कृष्ट प्रदेश-उदीरणा किसके होती है ? ॥४०६॥ समाधान-समयाधिक आवली कालवाले और चरमसमयमे पुरुषवेदका वेदन करनेवाले क्षपकके होती है ॥४०७॥ शंका-नपुंसकवेदकी उत्कृष्ट प्रदेश-उदीरणा किसके होती है ? ॥४०८॥ समाधान-समयाधिक आवली कालवाले चरमसमयवर्ती नपुंसकवेदक क्षपकके होती है ॥४०९॥ विशेषार्थ-यहाँ सर्वत्र समयाधिक आवलीवाले चरमसमयसे, एक समय अधिक आवलीप्रमाण कालके पश्चात् विवक्षित वेदका अन्तिम समयमे वेदन करनेवाले जीवका अभिप्राय है। शंका-छह नोकषायोकी उत्कृष्ट प्रदेश-उदीरणा किसके होती है ? ॥४१०॥ समाधान-अपूर्वकरणगुणस्थानके अन्तिम समयमे वर्तमान क्षपकके होती है ।।४११।। चूर्णिसू०-अव जघन्य प्रदेश-उदीरणाके स्वामित्वको कहते हैं ॥४१२॥ शंका-मिथ्यात्वकी जघन्य प्रदेश-उदीरणा किसके होती है ? ॥४१३॥ समाधान-उत्कृष्ट संक्लेशवाले या ईपन्मध्यमपरिणामवाले संजी मिथ्याष्टिके होती है ॥४१४॥ शंका-सम्यक्त्वप्रकृतिकी जघन्य प्रदेश-उदीरणा किसके होती है ? ॥४१५॥ समाधान-(चतुर्थ गुणस्थानके योग्य ) सर्वोत्कृष्ट संक्लेशको प्राप्त या ईपन्मध्यम
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
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