SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 615
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ५०७ गा० ६२] अनुभाग-उदीरणा-स्वामित्व-निरूपण माणसंजलणस्स जहण्णाणुभागउदीरणा कस्स १ २८०. खवगस्स चरिमसमयमाणवेदगस्स । २८१. मायासंजलणस्स जहण्णाणुभागउदीरणा कस्स २८२. खवगस्स चरिमसमयमायावेदगस्स । २८३. लोहसंजलणस्स जहण्णाणुभागउदीरणा कस्स ? २८४. खवयस्स समयाहियावलिय चरिमसमयसकसायस्स' । २८५, इत्थिवेदस्स जहण्णाणुभागउदीरणा कस्स ? २८६. इत्थिवेदखवगस्स समयाहियावलियचरिमसमयसवेदस्स । २८७. पुरिसवेदस्स जहण्णाणुभागउदीरणा कस्स ? २८८. पुरिसवेदखवगस्स समयाहियावलियचरिमसमयसवेदस्स । २८९. णqसयवेदस्स जहण्णाणुभागुदीरणा कस्स ? २९०. णवंसयवेदखवयस्स समयाहियावलिय-चरिमसमयसवेदस्स । २९१. छण्णोकसायाणं जहण्णाणुभागुदीरणा कस्स ? २९२. खवगस्स चरिमसमय-अपुचकरणे चट्टमाणस्स। शंका-संचलनमानकी जघन्य अनुभाग-उदीरणा किसके होती है ? ॥२७९।। समाधान-चरमसमयवर्ती मानका वेदन करनेवाले अनिवृत्ति संयत क्षपकके होती है ॥२८०॥ शंका-संज्वलन मायाकी जघन्य अनुभाग-उदीरणा किसके होती है ? ॥२८१॥ समाधान-चरमसमयवर्ती माया-वेदक अनिवृत्तिसंयत क्षपकके होती है ।।२८२।। शंका-संज्वलन लोभकी जघन्य अनुभाग-उदीरणा किसके होती है ? ॥२८३।। समाधान-समयाधिक आवलीके चरम समयमे वर्तमान सकषाय (सूक्ष्मसाम्पराय गुणस्थानवर्ती) क्षपकके होती है ॥२८४॥ शंका-स्त्रीवेदकी जघन्य अनुभाग-उदीरणा किसके होती है ? ॥२८५॥ समाधान-समयाधिक आवलीके चरमसमयवर्ती सवेदी स्त्रीवेद-क्षपकके होती है ॥२८६॥ शंका-पुरुषवेदकी जघन्य अनुभाग-उदीरणा किसके होती है ? ॥२८७॥ समाधान-समयाधिक आवलीके चरमसमयवर्ती सवेदी पुरुषवेद-क्षपकके होती है ॥२८८॥ शंका-नपुंसकवेदकी जघन्य अनुभाग-उदीरणा किसके होती है ? ॥२८९॥ समाधान-समयाधिक आवलीके चरमसमयवर्ती सवेदी नपुंसकवेद-क्षपकके होती है ॥२९॥ शंका-हास्यादि छह नोकषायोकी जघन्य अनुभाग-उदीरणा किसके होती है ॥२९१॥ समाधान-अपूर्वकरण गुणस्थानके अन्तिम समयमे वर्तमान क्षपकके होती है ॥२९२॥ १ कुदो, समयाहियावलियचरिमसमयवट्टमाण सुहुमसापराइयखवगस्स सुहुमकिट्टिसरूवाणुभागोदीरणाए सुठु जहण्णभावोववत्तीदो । जयध० २ कुदो, तत्थेदेसिमपुत्वकरणचरिमविसोहीए हेटिठमासेसविसोहीहितो अणतगुणाए उदीरिजमाणाणुभागस सुछ जहण्णाणुभावोववत्तीदो । जयध°
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy