SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 56
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ कसा पाहुडें पृ० ३१६, सूं०२६. उक्कस्सयो पुण विखेवो केत्ति १ २७, जत्तियाँ उक्कस्सिया कम्मट्ठिदी उक्कस्सियाए आवाहाए समयुत्तरावलियाए च ऊणा ततिश्रो उक्त क्खेिवो । ३४ उत्कृष्ट निक्षेपके उक्त प्रमाणको कम्मपयडीकी निम्न गाथासे मिलान कीजिएश्रावलि असंखभागाइ जाव कम्महि त्ति शिक्खेवो । समउत्तरालियाए सावाहाए भवे ऊणे || २ || ( उद्वर्तनापवर्तनाकरण) (१०) वेदक अधिकारमें प्रकृति - उदीरणा के स्थान इस प्रकार बतलाये गये हैंपृ० ४६८, सू० १२. अत्थि एक्किस्से पयडीए पवेसगो । १३. दोहं पयडीणं पवेसगो । १४. तिहं पयडीणं पवेसंगो रात्थि । १५, चउरहं पयडीणं पवेसगो । १६. एतो पाए गिरंतरमत्थि जाव दसरहं पयडीणं पवेसगो । अर्थात् मोहकर्म के प्रकृतिउदीरणा स्थान १, २, ४, ५, ६, ७, ८, ६ और १० प्रकृतिरूप ६ होते हैं । इन्हीं स्थानोंको कम्मपयडीमें इस प्रकार कहा गया है पंचरहं च चउरहं विइए एक्काड़ जा दसरहं तु । तिगहीणाइ मोहे मिच्छे सत्ता जाव दस || २२ || ( उदीरणाकरण) (११) वेदक अधिकारमें मोहकी अनुभाग- उदीरणा के स्वामित्वका वर्णन कम्मपयडी के अनुभाग उदीरणाके स्वामित्वसे ज्यों का त्यों मिलता है । यहाँ दोनोंकी समता - परिज्ञानार्थ एक उदाहरण प्रस्तुत है— पृ० ५०५ ० २६२. हस्स रदी मुक्कस्सा णुभागउदीरणा कस्स १ २६३. सदार - सहस्सार देवस्स सव्वसंकिलिङ्कस्स । इसका मिलान कम्मपयडीकी गाथासे कीजिए हास - रईणं सहस्सार गस्स पजत देवस्स ॥ ६१ ॥ ( अनुभागउदी० ) (१२) कसा पाहुडके अनुभागसंक्रमका एक अल्पबहुत्व इस प्रकार है पृ० ३४६, सू० ११. एत्थ अप्पा हु । १२. सव्वत्थोवाणि पदेसगुणहाfugi तरफदयाणि । १३. जहरण क्खेिवे । तगुणो । १४ जहणिया अइच्छावरणा अणंतगुणा । १५. उक्कस्सयमणुभागकंडयमणंतगुणं । १६. उक्कस्सिया अच्छावणाएगाए वग्गणाए ऊणिया । १७. उक्कल्सश्र णिक्खेवे। विसेसाहियो । १८, उक्कस्स बंधो विसेसाहियो । उक्त चूर्णिसूत्रोंका मिलान कम्मपयडीकी निम्न गाथाओंसे कीजिएथोवं परसगुणहाणि अंतरं दुसु जहन्ननिक्खेवो । कमसे तगुणि दुसु वि हत्थावरणातुल्ला ॥ = ॥ वाघाएणुभागक्कं डगमेक्काइवग्गणाऊणं । उक्कस्सो क्खेिवो ससंतबंधा य सविसेसो || ६ || ( उद्वर्तनापवर्तनाकरण )
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy