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________________ [ ५ संक्रम-अर्थाधिकार ४३८ कसाय पाहुड सुन्त होदि ? ४४०. जहणेण अंतोमुहुतं' । ४४१. उकस्सेण उवडपोग्गल परियङ्कं । ४४२. गदीसु च साहेयव्वं । 3 ४४३ ए दिए सम्मत्त सम्मामिच्छत्ताणं णत्थि किंचि विअंतर । ४४४. सोलसकसाय- भय दुर्गुछाणं भुजगार - अप्पयरसं कामयंतरं केवचिरं कालादो होदि ? ४४५. जहणेण एयसमओ ४४६. उक्कस्सेण पलिदोवमस्स असंखेज्जदिभागो । ४४७. अवद्विदसं कामयं तर केवचिर कालादो होदि ९ ४४८. जहणेण एयसमओ । ४४९. उक्कस्सेण अनंतकालमसंखेज्जा पोग्गलपरियट्टा । ४५० सेसाणं सत्तणोकसायाणं भुजगारअप्पयरसं कामयं तर केवचिर कालादो होदि ९ ४५१. जहणेण एयसमओ । ४५२. उक्कस्सेण अंतोमुहुत्तं । समाधान-जघन्य अन्तरकाल एक समय और उत्कृष्ट अन्तरकाल उपार्ध पुद्गलपरिवर्तन है ॥ ४४०-४४१॥ चूर्णिसू० - इसीप्रकार ओके अनुसार चारो गतियो मे भुजाकारादि संक्रामको का अन्तर सिद्ध करना चाहिए ||४४२ ॥ चूर्णिसू०- ( इन्द्रियमार्गणाकी अपेक्षा ) एकेन्द्रियोमे सम्यक्त्वप्रकृति और सभ्य - ग्मिथ्यात्व के भुजाकारादि संक्रामकोका कुछ भी अन्तर नही है ||४४३ || शंका - सोलह कपाय, भय और जुगुप्सा के भुजाकार और अल्पतर संक्रामकोका अन्तरकाल कितना है ? ॥ ४४४ ॥ समाधान - जघन्य अन्तरकाल एक समय और उत्कृष्ट अन्तरकाल पल्योपमके असंख्यातवें भागप्रमाण है ||४४५-४४६ ॥ शंका-उक्त कर्मोंके अवस्थितसंक्रामकोका अन्तरकाल कितना है ? ||४४७॥ समाधान - जघन्य अन्तरकाल एक समय और उत्कृष्ट अन्तरकाल असंख्यात पुद्गलपरिवर्तनप्रमित अनन्तकाल है ॥४४८- ४४९॥ शंका- शेप सात नोकषायोके भुजाकार और अल्पतर संक्रामकोका अन्तर कितना है ? ॥ ४५० ॥ समाधान-जघन्य अन्तरकाल एक समय और उत्कृष्ट अन्तरकाल अन्तर्मुहूर्त - प्रमाण है ।।४५१-४५२॥ १ कुदो; सव्वोवसामणापडिवाद जहण्ण तरस्स तप्पमाणोवलभादो । जयध० २ कुदो; तत्थ सभवताण पि भुजगारप्पदरपदाणं लद्धतरकरणोवायाभावादो | जयघ ३ कुदो; भुजगारप्पयरका लाणमुक्कस्त्रेण पलिदोवमासखेजभागपमाणाण जोन्हुदरपक्खाण व परिवत्तमणामण्णोष्णेतरदाणमेइ दिएसु सभवे विशेहाभावादो । जयध० ४ परियतमाणबंधपयडीसु भुजगारप्पयरकालस्स अतोमुहुत्तपमाणस्स अष्णोष्णतरभावेण समुवलate विसवादाणुवलभादो । जयघ०
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
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