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________________ ३६० ___ कसाय पाहुड सुत्त [५ संक्रम-अर्थाधिकार १३६. उकस्सेण उवड्पोग्गलपरियट्ट । १३७,अणंताणुवंधीणं जहण्णाणुभागसंकामयंतरं केवचिरं कालादो होदि ? १३८. जहण्णेण अंतोमुहुत्तं । १३९. उक्कस्सेण उवड्डपोग्गलपरियट्ट । १४०. अजहण्णाणुभागसंकामयंतरं केवचिरं कालादो होदि १ १४१. जहण्णेण अंतोमुहुत्तं । १४२. उक्कस्सेण वे छावहिसागरोवमाणि सादिरेयाणि । १४३. सेसाणं कम्माणं जहण्णाणुभागसंकामयंतरं केवचिरं कालादो होदि ? । १४४. पत्थि अंतरं । १४५. अजहण्णाणुभागसंकामयंतरं केवचिरं कालादो होदि ? काल कितना है ? ॥१३४॥ समाधान-उक्त दोनो प्रकृतियोके अजघन्य अनुभागसंक्रमणका जघन्य अन्तरकाल एक समय और उत्कृष्ट अन्तरकाल उपाधपुद्गलपरिवर्तन है ।।१३५-१३६।। शंका-अनन्तानुवन्धी कषायोके जघन्य अनुभागसंक्रमणका अन्तरकाल कितना है ? ॥१३७।। समाधान-जघन्य अन्तरकाल अन्तमुहूर्त और उत्कृष्ट अन्तरकाल उपाधपुद्गलपरिवर्तन है ॥१३८-१३९।। शंका-अनन्तानुबन्धी कपायोके अजघन्य अनुभागके संक्रमणका अन्तरकाल कितना है ? ।।१४०॥ समाधान-जघन्य अन्तरकाल अन्तमुहूर्त है और उत्कृष्ट अन्तरकाल कुछ अधिक एक सौ बत्तीस सागरोपम है ।।१४१-१४२॥ शंका-शेष चार संज्वलन और नव नोकपाय, इन तेरह कर्मोंके जघन्य अनुभागसंक्रमणका अन्तरकाल कितना है ? ।।१४३।। समाधान-उक्त तेरह कर्मोंके जघन्य अनुभागसंक्रमणका अन्तर नहीं होता है ।।१४४॥ शंका-उन्ही तेरह कर्मों के अजघन्य अनुभागसंक्रमणका अन्तर काल कितना है ? ॥१४५।। १ तं जहा-अणताणुवधीण सजुत्तपढमसमयणवकवधमावलियादीद जहण्णभावेण सकामिय तत्तो विदिया दिसमएसु अजहण्णभावेण तरिय पुणो वि सवलहुएण कालेण विसजोयणापुन तप्पाओग्गजहणपरिणामेण सजुत्तो होऊणावलियादिक्कतो जहण्णाणुभागसंकामओ जादो । लद्धमतर होइ । जयध २ तं जहा-पुन्बुत्तेणेव विहिणा आदि कादूणतरिय उवढपोग्गलपरियह परिभमिय थोवावसेसे सिल्झिदव्बए त्ति सम्मत्त पडिवजिय अणंताणुव धिविसजोयणा पुरस्सरं परिणामपचएण सजुत्तो होऊण आवलियादिक्कतो जहण्णाणुभागसकामओ जादो । लद्धमुक्कस्सतर होइ । जयध० ३ उवसमसम्मत्तकालभतरे चेय अणंताणुव धिचउक्कं विसजोइय वेदयसम्मत्त घेत्तूण वे छावट्टि सागरोवमाणि परिभमिय तदवसाणे मिच्छत्त गतूणावलियादीदं सकामेमाणस लद्ध मुक्कत्समंतर होइ । एत्य सादिरेयपमाणमतोमुहुत्त । जयघ ४ कुदो खवणाए जादजहण्णाणुभागत्तादो । जयध०
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
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