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________________ २१० कसाय पाहुड लुत्त [५ प्रदेशविभक्ति २६३. एइंदिएसु सव्वत्थोवं सम्मत्ते जहण्णपदेससंतकम्मं । २६४. सम्मामिच्छत्ते जहण्णपदेससंतकम्ममसंखेज्जगुणं । २६५. अणंताणुवंधिमाणे जहण्णपदेससंतकम्ममसंखेज्जगुणं । २६६. कोहे जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २६७. मायाए जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २६८. लोभे जहण्णपदेससंतकस्मं विसेसाहियं । २६९. मिच्छत्ते जहण्णपदेससंतकम्ममसंखेज्जगुणं । २७०. अपच्चरखाणमाणे जहण्णपदेससंतकम्ममसंखेज्जगुणं । २७१. कोधे जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २७२. मायाए जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २७३. लोभे जहण्णपदेससंतकम्म विसेसाहियं । २७४. पञ्चक्खाणमाणे जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २७५. कोहे जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २७६. मायाए जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २७७, लोहे जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । है, उसी प्रकारसे सर्व गतियोमे जानना चाहिए । केवल मनुष्यगतिमे ओघके समान अल्पवहुत्व है ॥२६१-२६२।। चूर्णिसू०-एकेन्द्रियोमे सम्यक्त्वप्रकृतिमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म वक्ष्यमाण सर्व पदोकी अपेक्षा सबसे कम है । सम्यक्त्वप्रकृतिके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे सम्यग्मिथ्यात्वप्रकृतिमें जघन्य प्रदेशसत्कर्म असंख्यातगुणा है । सम्यग्मिथ्यात्वप्रकृतिके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे अनन्तानुवन्धीमानकषायमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म असंख्यातगुणा है। अनन्तानुबन्धीमानकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे अनन्तानुबन्धीक्रोधकषायमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है। अनन्तानुबन्धीक्रोधकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे अनन्तानुबन्धीमायाकषायमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेप अधिक है। अनन्तानुबन्धीमायाकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे अनन्तानुवन्धीलोभकपायमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेप अधिक है ॥२६३-२६८॥ चूर्णिसू०-अनन्तानुवन्धीलोभकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे मिथ्यात्वप्रकृतिमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म असंख्यातगुणा है। मिथ्यात्वप्रकृतिके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे अप्रत्याख्यानावरणमानकपायमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म असंख्यातगुणा है। अप्रत्याख्यानावरणमानकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे अप्रत्याख्यानावरणक्रोधकपायम जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है । अप्रत्याख्यानावरणक्रोधकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्भसे अप्रत्याख्यानावरणमायाकपायमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेप अधिक है । अप्रत्याख्यानावरणमायाकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे अप्रत्याख्यानावरणलोभकपायमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेप अधिक है ॥२६९-२७३।।। चूर्णिसू०-अप्रत्याख्यानावरणलोभकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे प्रत्याख्यानावरणमानकपायमें जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेप अधिक है। प्रत्याख्यानावरणमानकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे प्रत्याख्यानावरणक्रोधकपायमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशंप अधिक है । प्रत्याख्यानावरणक्रोधकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे प्रत्याख्यानावरणमायाकपायम जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है । प्रत्याख्यानावरणमायाकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्ममे प्रत्याख्याना
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
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