SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 315
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ गा० २२] उत्तरप्रकृतिप्रदेशविभक्ति-अल्पवहुत्व-निरूपण २०९ पदेससंतकम्म विसेसाहियं । २४६. मायाए जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २४७. लोभे जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २४८. इत्थिवेदे जहण्णपदेससंतकम्ममणंतगुणं । २४९. णबुसयवेदे जहण्णपदेससंतकमां संखेज्जगुणं । २५०. पुरिसवेदे जहण्णपदेससंतकम्ममसंखेज्जगुणं । २५१. हस्से जहण्णपदेससंतकम्मं संखेज्जगुणं । २५२. रदीए जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २५३. सोगे जहण्णपदेससंतकम्मं संखेज्जगुणं । २५४. अरदीए जहण्णपदेससंतकमां विसे साहियं । २५५. दुगुंछाए जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २५६. भए जहण्णपदेससंतकम्म विसेसाहियं ।। २५७. माणसंजलणे जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २५८. कोहसंजलणे जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २५९. मायासंजलणे जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं। २६०. लोहसंजलणे जहण्णपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । २६१.जहा णिरयगईए तहा सव्वासु गईसु ।२६२.णवरि मणुसगदीए ओघं। प्रदेशसत्कर्मसे प्रत्याख्यानावरण क्रोधकपायमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है । प्रत्याख्यानावरणक्रोधकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे प्रत्याख्यानावरण मायाकपायम जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेप अधिक है। प्रत्याख्यानावरण मायाकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे प्रत्याख्यानावरण लोभकषायमे जधन्य प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है ॥२४४-२४७॥ चूर्णिम् ०-प्रत्याख्यानावरण लोभकपायके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे स्त्रीवेदमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म अनन्तगुणा है । स्त्रीवेदके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे नपुंसकवेदमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म संख्यातगुणा है । नपुंसकवेदके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे पुरुषवेदमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म असंख्यातगुणा है। पुरुपवेदके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे हास्यप्रकृतिमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म संख्यातगुणा है। हास्यप्रकृतिके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे रतिप्रकृतिमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है। रतिप्रकृतिके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे शोकप्रकृतिमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म संख्यातगुणा है । शोकप्रकृतिके जघन्य प्रदेशसत्कर्ममे अरतिप्रकृतिमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेप अधिक है । अरतिप्रकृतिके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे जुगुप्साप्रकृतिमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है। जुगुप्साप्रकृतिके जवन्य प्रदेशसत्कर्मसे भयप्रकृतिमे जवन्य प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है ॥२४८-२५६॥ चूर्णिसू०-भयप्रकृतिके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे संचलनमानमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेप अधिक है। संज्वलनमानके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे संचलनक्रोधमे जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेप अधिक है । संज्वलनकोधके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे संचलनमायाम जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेप अधिक है । संज्वलनमायाके जघन्य प्रदेशसत्कर्मसे संज्वलनलोभम जघन्य प्रदेशसत्कर्म विशेप अधिक है। ॥२५७-२६०॥ चूर्णिम०-जिस प्रकारने नरकगतिमे जघन्य प्रदेशसकर्मसम्बन्धी अल्पबाब का २७
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy