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बुद्ध ने अनात्मवाद के साथ अनीश्वरवाद को भी स्वीकार किया है। ईश्वर विश्व का स्रष्टा नहीं है यह विश्व केवल प्रतीत्य समुत्पाद के नियम से ही संचालित होता है। ईश्वर को मानना हास्यास्पद है।
सम्प्रदाय
बुद्ध के निर्वाण के लगभग १०० वर्ष बाद वैशाली में कालाशोक के समय में सम्पन्न द्वितीय बौद्ध संगीत में ही इस धर्म में मतभेद शुरू हो गये थे। इसी समय बौद्ध धर्म के थेर भिक्षु और महासंघिक भिक्षु में विवाद हुआ और कालान्तर में थेर भिक्षु हीनयान के रूप में और महासंघिक भिक्षु महायान के रूप में प्रसिद्ध हुये। हीनयान अनीश्वरवादी दर्शन है, यह बहुतत्ववादी होने के साथ वस्तुवादी दर्शन भी है। इसमें व्यक्तिगत निर्वाण को महत्व दिया जाता है। इसका आदार्श 'अर्हत' है जबकि इसके विपरीत महायान दर्शन है जो सर्वमुक्ति की कल्पना पर आधारित है और इसका आदर्श बोधिसत्व है।
बौद्ध मत के सम्प्रदाय
। महायान
हीनयान
वैभाषिक साहि० सौतान्त्रिक माध्यमिक (बाह्यप्रत्यक्षवादी) (बाह्ययानुमेयवादी) (शून्यवाद)
योगाचार (विज्ञानवाद)
वैभाषिक सम्प्रदाय में बाह्य और अन्तर दोनों प्रकार के पदार्थों की सत्यता स्वीकार की गयी है और दोनों को प्रत्यक्ष माना गया है। इस सम्प्रदाय में रूप, विज्ञान