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________________ । ७ । प्र० ७०-मोहरुपी शराब क्या है ? प्र० ७१-सै प• कैलाशचन्द्र हूं-मोहरुपी शराब की चार बातें लगाकर लगाओ? प्र० ७२-मै व्यापार करता हू। मोहरुपी शराब की चार बातें लगाकर लगाओ? प्र०७३-मै चाय पीता हूं-मोहरुपी शराब की चार बाते लगा. कर वताओ? प्र०७४-मेरोधर्मपत्नी है-मोहतगी की चार बाते लगाकर बताओ? प्र. ७५-मै सत्य बोलता हू-मोहरुपी शराब की चार बाते लगाकर बताओ? प्र. ७६-भविष्य की आयु का बन्ध कब और कैसे होता है ? प्र० ७७-छहढाला की प्रथम ढाल में प्रथम निगोद के दुःखो का वर्णन क्यो किया? प्र०७५-पृथ्वीकायिक के दुःखो का वर्णन क्यो किया ? प्र० ७६-जलकायिक के दुःखो का वर्णन क्यो किया? प्र०८०-अग्निकायिक के दु.खो का वर्णन क्यो किया? प्र० ८१-वायुकायिक के दुःखो का वर्णन क्यो किया ? प्र०८२-वनस्पतिकायिक के दुःखो का वर्णन क्यो किया ? प्र०८३-असैनी के दु खो का वर्णन क्यो किया ? प्र०८४-संज्ञी सांप के दुःखो का वर्णन क्यो किया ? प्र०८५-गधो के दुःखो का वर्णन क्यो किया? प्र०८६-कुत्ते के दुःखो का वर्णन क्यो किया ? प्र०८७-बिल्ली के दु खो का वर्णन क्यो किया?
SR No.010123
Book TitleJain Siddhant Pravesh Ratnamala 08
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Mumukshu Mandal Dehradun
PublisherDigambar Jain Mumukshu Mandal
Publication Year
Total Pages319
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size11 MB
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