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________________ परिशिष्ट 245 161 181 जेसे वर्णी ( सकलेन्द्र भ्राता) 100 देवर वल्लभ 86, 113 जैसराज वर्णी 63 देवसेन 123, 187 जैता ब्रह्मचारी 174 देवसूरि ज्ञानकीर्ति ( वादिभूषण शिष्य) देवाचार्य 214, 225 देवेन्द्रकीर्ति 11, 12, 14, 15, 17, ज्ञानभूषण 16, 46, 51, 12, 14, 30, 35, 73, 86, 85, 146, 62, 152, 153, 155, 156, 180, 208, 206, 212, 216, 156, 171, 224 217, 218 ज्ञानभूषण (भट्टारक ) 26, 40, 42, दवेन्द्र भूषण ( भट्टारक) 140 43, 44 देवेन्द्रयशा ( देवेन्द्रकोर्ति) 206 तेजपाल (पंडित) 62 धनंजय 127, 206 त्रिभुवनकीर्ति 55, 68, 204 धनंजयसूरि 12 त्रिलोककीर्ति ( भट्टारक) 25, 35 धरसेन त्रैलोक्यदीपक 203, 205 धरसेन पंडित ( वीरसेन शिष्य) 74 203 धरसेनाचार्य विक्रम (कवि) 144 धर्मकीर्ति 36, 37, 118 दयापाल 2 धर्मचन्द्र 12, 172, 173 दामनन्दि 166 धर्मचन्द्र मुनि दामोदर (भ० धर्मचन्द्र शिष्य ) 71 धर्मचन्द्र (भट्टारक) दिविजेन्द्रकीर्ति ( भट्टारक) 62, 155 धर्मदास (ब्रह्मचारी) 188, 126 धर्मसेन 4,83, 63, 15, 16, 17 देव ( अकलंकदेव) 2, 3, 118 103, 178 देवकीर्ति 203 देवचन्द्र मुनोन्द्र नयसेनार्य 172 देवदत्त (कवि दीक्षित) 72, 140 नरेन्द्रसेन 2, 104, 134 देवनन्दि (शिष्य भ० विनयचन्द्र) 25 नरेन्द्रकीर्ति (भहारक) 41, 77 देवनन्दी 144 नंदिगुरु 619, 120 त्रैलोक्यसार दुर्गदेव 80 धर्माकार
SR No.010101
Book TitleJain Granth Prashasti Sangraha 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorParmanand Jain
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year1954
Total Pages398
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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