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________________ २. जैन धर्म की मूलभूत जानकारी प्रस्तावना : “जैनॉलॉजी अर्थात् जैनविद्या” अभ्यास की एक स्वतंत्र शाखा है । जैनविद्या के सभी आयाम हरेक अभ्यासक के हमेशा सामने होने चाहिए । पिछले सात सालों से हमने बहुत जानकारी तो हासिल की है, लेकिन इस पष्ठ की यह विशेषता है कि उस जानकारी का वर्गीकरण प्रस्तुत किया है । जैन इतिहास-पुराण के कुछ व्यक्तिमत्व आरंभ में दिये हैं । षड्द्द्रव्य विश्व की ‘Realities' हैं । नवतत्त्वों में नैतिक (Ethical) और आध्यात्मिक (Spiritual) विचार निहित हैं । 'कर्मसिद्धान्त' जैनधर्म का अग्रिम सिद्धान्त है । रागद्वेष, लेश्या, कषाय आदि की जानकारी 'कर्मबन्ध के कारण ' में प्रस्तुत की है । अपेक्षा है कि इस मानवीय दोषों से हम दूर रहने का प्रयास करें । 'आचार' - विभाग साधु-आचार मूलतत्त्व और श्रावक - व्रतों के नाम दिये हैं । विशेष सूचना : इस पाठ में बहुत सारे पारिभाषिक शब्द समाविष्ट हैं । उनका शुद्ध रूप में लेखन करना विद्यार्थियों के लिए आसान नहीं है । इस पाठपर आधारित प्रश्न निम्न प्रकार के होंगे १) उचित जोड लगाइए । २) सही या गलत बताइए । ३) उचित पर्याय चुनिए । वर्णनात्मक प्रश्न पूछे नहीं जाएँगे । -
SR No.009954
Book TitleJainology Parichaya 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNalini Joshi
PublisherSanmati Tirth Prakashan Pune
Publication Year2011
Total Pages39
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size265 KB
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