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________________ १.प्रार्थना संकल्प हो हमारा , इन्सान हम बनेंगे । इन्सान बन गये तो , भगवान भी बनेंगे ।।धृ.।। हो जैन-बौद्ध-मुस्लिम , हिन्दु हो या इसाई । आपस में लगते भाई , सबको गले मिलेंगे ।।१।। हम एक ही गगन के , चमके हुए सितारे । लगते हैं कितने प्यारे , हँसते रहे हसेंगे ।।२।। हम एक ही चमन के , खिलते हुए सुमन है । लगते हैं कितने प्यारे , खिलते रहे खिलेंगे ।।३।। मंदिर तो एक ही है , दीपक हैं न्यारे न्यारे । लगते हैं कितने प्यारे, जलते रहे जलेंगे ।।४।। मंजिल तो एक ही है , रस्तें हैं न्यारे न्यारे । लगते हैं कितने प्यारे , चलते रहे चलेंगे ।।५।। हम एक ही जमीं के , मानव है सारे प्यारे । सब दिल से दिल मिला के , मिलते रहे मिलेंगे ।।६।। हो राम श्याम महावीर , सबमें है तू समाया । तेरा ही नाम लेके , जीवन सफल करेंगे ।।७।। छोटा बडा न कोई , ना भेद डालो भाई । भाई से भाई मिल के , बढते रहे बढेंगे ।।८।। हो गीता कुराण आगम , गुरुग्रंथ हो त्रिपिटक । इन्सानियत की गाथा , हम प्रेम से पढ़ेंगे ।।९।। **********
SR No.009954
Book TitleJainology Parichaya 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNalini Joshi
PublisherSanmati Tirth Prakashan Pune
Publication Year2011
Total Pages39
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size265 KB
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