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“श्रावक/उपासक के लिए ग्यारह पद अथवा प्रतिमा कही गयी हैं।
"प्रतिमाएँ"
• सम्यग्दर्शन मे विशुद्धि उत्पन्न करने वाली दर्शन प्रतिमा है।
• अणुव्रत पाँच, गुणव्रत तीन एवं शिक्षाव्रत चार कुल बारह व्रतों का आचरण
व्रत प्रतिमा हैं।
• सामायिक की प्रवृति सामायिक प्रतिमा हैं।
• पर्व में उपवास - विधि करना प्रोषध प्रतिमा हैं।
• सचित्त का त्याग सचित्त विरत प्रतिमा हैं।
• दिन मे स्त्री-स्पर्श त्याग दिवा मैथुन व्रत प्रतिमा हैं।
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• आठों पहर स्त्री मात्र का त्याग ब्रह्मर्चय प्रतिमा हैं।
• जो सेवा, कृषि, वाणिज्य आदि का पापारंभ नही करता एंव धर्म मे सावधान
रहता है वह निरारंभ प्रतिमा हैं।
परिग्रह का त्याग, परिग्रह त्याग प्रतिमा हैं।
• पाप की शिक्षा का त्याग अनुमतित्याग प्रतिमा है।
• अपने वास्ते बनाये हुए भोजनादि का त्याग उद्देशविरति प्रतिमा है।
सम्बन्धित विषय को विस्तार से पढने के लिए “समयसार” का पेज नम्बर 385 देखें।
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(राजेश कुमार जैन, मुरादाबाद) ( रचियता, संग्रह कर्ता एंव शोध कर्ता)