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________________ णमोक्कार मंत्र द्वारा नवतत्त्व का बोध ८५ नयवाद के परिप्रेक्ष्य में णमोक्कार का विश्लेषण ११४ नैगम नय संग्रह नय व्यवहार नय ऋजुसूत्र नय शब्द नय समभिरूढ़ नय एवंभूत नय शुद्ध नयानुसार आत्मा का स्वरूप अष्टांगयोग : नवकार महामंत्र परिशीलन ९४ णमोक्कार मंत्र का ध्यान और प्रभाव ११२ णमोक्कार मंत्र में मैत्री आदि भावना चतुष्टय का समन्वय णमोक्कार : सकाम निर्जरा का पथ ज्योतिष-शास्त्र की दृष्टि से णमोक्कार मंत्र का मूल्यांकन गणितशास्त्र के अनुसार णमोक्कार की महत्ता, परिपूर्णता राजनैतिक दृष्टि से णमोक्कार मंत्र की सर्वोत्कृष्टता अर्थशास्त्र के सिद्धान्तानुसार णमोक्कार की सर्वाधिक महत्ता १२९ न्याय-तंत्र के संदर्भ में णमोक्कार मंत्र १३२ वैधानिक दृष्टि से णमोक्कार मंत्र की अपरिवर्तनीयता णमोक्कार मंगल-सूत्रों का आत्मा के साथ संबंध १३६ णमोक्कार मंत्र : सुख का अनन्य हेतु १३६ विकार-विजय में मंगलसूत्रों का सार्थक्य १४१ णमोक्कार : परमात्म-साक्षात्कार का निर्बाध माध्यम यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा, ध्यान और समाधि णमोक्कार मंत्र में समग्र रसों का समावेश ९९ णमोक्कार मंत्र और रंग-विज्ञान का सामंजस्य १०३ ललित कलाओं में नवकार का आध्यात्मिक लालित्य १४१ णमोक्कार की सर्व-सिद्धान्त-सम्मतता। १४५ सार-संक्षेप १४७
SR No.009286
Book TitleNamo Siddhanam Pad Samikshatmak Parishilan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDharmsheelashreeji
PublisherUjjwal Dharm Trust
Publication Year2001
Total Pages561
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size53 MB
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