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________________ ७ * प्रासादमञ्जरी * 70 - - - . - T - T Ham. PCS Acc FA । . 2011 S - मान. TRam KON DRON म LE साली (यह प्रासाद दूसरे प्रकार से भी कहा गया है । रेखा कर्ण उपरे उपरापर दो श्रृङ्ग ओर स्थ-भद्र पर उद्गमदोढिया चढाने से वह सर्वतोभद्र नामक नौ अंडकका प्रासाद जानना । इतिसर्वतोभद्र प्रासाद २ । तुल भाग १० अंग ९ ___ तृतिय प्रासादः-- दशाई तलके उपर दूसरा भेद कहते है। भद्रके ऊपर एक ऊरुश्रृङ्ग चढाने से “दन" नामका तेरह अंडकका तीसरा प्रासाद जानना । ११० चौथा प्रासादः---उसी प्रकार दशाइ तल पर तीसरा भेद कहते हैं। रेखा कर्ण पर दो श्रङ्ग हैं, सो एक रखके प्रतिरथ पर श्रङ्ग चढाने से चोथा “नंदशाल" नामक प्रासाद सत्रह अंडकका जानना । इति नंदशाल ११० ITTER
SR No.008427
Book TitlePrasad Manjari
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPrabhashankar Oghadbhai Sompura
PublisherBalwantrai Sompura
Publication Year1965
Total Pages158
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Art
File Size5 MB
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