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________________ ७. १९-३२ ] व्रत और शील के अतिचार व्रत व शील के अतिचारों की सख्या तथा नाम-निर्देश व्रतशीलेषु पञ्च पञ्च यथाक्रमम् । १९ । बन्धवधच्छविच्छेदातिभारारोपणान्नपाननिरोधाः । २० । मिथ्योपदेशर हस्याभ्याख्यानकूटलेख क्रियान्यासापहारसाकार मन्त्रभेदाः । २१ । स्तेनप्रयोगतदाहृतादानविरुद्ध राज्यातिक्रमहीनाधिकमानोन्मानप्रतिरूपकव्यवहाराः । २२ । परविवाह करणेत्वरपरिगृहीताऽपरिगृहीतागमनानङ्गक्रीडातीव्रकामाभिनिवेशाः । २३ । क्षेत्रवास्तु हिरण्यसुवर्णधनधान्यदासीदास कुप्यप्रमाणातिक्रमाः । २४ । ऊर्ध्वाधस्तिर्यग्व्यतिक्रमक्षेत्र वृद्धिस्मृत्यन्तर्धानानि । २५ । आनयन प्रेष्यप्रयोगशब्दरूपानुपातपुद्गलक्षेपाः । २६ । कन्दर्पौत्कुच्यमौखर्यासमीक्ष्याधिकरणोप भोगाधिकत्वानि । २७ । योगदुष्प्रणिधानानादरस्मृत्यनुपस्थापनानि । २८ । अप्रत्यवेक्षिताप्रमार्जितोत्सर्गादाननिक्षेप संस्ता रोपक्रमणानादरस्मृत्य - नुपस्थापनानि । २९ ॥ सचित्तसम्बद्धसंमिश्राभिषवदुष्पक्वाहाराः । ३० । Jain Education International सचित्तनिक्षेपपिधानपरव्यपदेशमात्सर्यकालातिक्रमाः । ३१ । जीवितमरणाशंसामित्रानुरागसुखानुबन्धनिदान करणानि । ३२ । व्रतों और शीलों के पाँच-पाँच अतिचार हैं । वे क्रमश: इस प्रकार हैं : बन्ध, वध, छविच्छेद, अतिभार का लादना और अन्न-पान का निरोध ये पाँच अतिचार प्रथम अहिसा अणुव्रत के है । मिथ्योपदेश, रहस्याभ्याख्यान, कूटलेखक्रिया, न्यासापहार और साकार-मन्त्रभेद ये पाँच अतिचार दूसरे सत्य अणुव्रत के है । स्तेनप्रयोग, स्तेनाहृतादान, विरोधी राज्य का अतिक्रम, हीनाधिक मानोन्मान और प्रतिरूपक व्यवहार ये पॉच अतिचार तीसरे अचौर्य अणुव्रत के हैं । १८५ परविवाहकरण, इत्वरपरिगृहीतागमन, अपरिगृहीतागमन, अनङ्गक्रीड़ा और तीव्रकामाभिनिवेश ये पाँच अतिचार चौथे ब्रह्मचर्य अणुव्रत के हैं । For Private Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.008066
Book TitleTattvarthasutra Hindi
Original Sutra AuthorUmaswati, Umaswami
AuthorSukhlal Sanghavi
PublisherParshwanath Vidyapith
Publication Year1976
Total Pages444
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Religion, Epistemology, Tattvartha Sutra, & Tattvarth
File Size9 MB
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