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कलिङ्ग देश का इतिहास
दिया, लोगों को धोखावाजी से ठगनेवाले ११३ वर्ष के तमर का देहसंधान को तोड़ दिया । बारहवें वर्ष में 'री उत्तरापथ में राजाओं को बहुत दुःख दिया ।
( १२ ) और मगध वासियों को बड़ा भारी भय उत्पन्न करते हुए हस्तियों को सुगंग ( प्रासाद ) तक ले गया और मगधाधिपति बृहस्पति को अपने चरणों में झुकाया । तथा राजानंद दास ले गई कलिंग जिन मूर्त्ति को और गृहरनों को लेकर प्रतिहारोंद्वारा अंग मगध का धन ले आया ।
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(१३)......अन्दर से लिखा हुआ ( खुदे हुए) सुन्दर शिखरों को बनवाया और साथ में सौ कारीगरों को जागीरें दीं अद्भुत और आश्चर्य ( हो ऐसी रीति से ) हाथियों के भरे हुए जहाज नजराना हो । हस्ती रत्न माणिक्य, पाडयराज के यहाँ से इस समय अनेक मोती मानिक रत्न लूट करके लाए ऐसे वह सक्त ( लायक महाराजा ) |
(१४) सब को वश किये। तेरहवें वर्ष में पवित्र कुमारी पर्वत के ऊपर जहाँ (जैन धर्म का ) विजय धर्म चक्र सुप्रवृत्तमान है। प्रक्षीण संसृति ( जन्म मरणों को नष्ट किये ) काय निषीदी ( स्तूप ) ऊपर ( रहनेवाले ) पाप को बतानेवाले ( पाप ज्ञापकों ) के लिये व्रत पूरे हो गये पश्चात् मिलनेवाले राज ( विभूतियाँ कायम कर दीं । ( शासनो बन्ध दिये ) पूजा में रक्त उपासक खारवेल ने जीव और शरीर की - श्री की परीक्षा करली ( जीव और शरीर परीक्षा कर ली है ) ।