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________________ २६ २७ २८ २९ ३० ३१ ३२ ३३ ३४ ३५ ३६ ३७ ३८ ३९ ४० ४१ ४२ ४३ शतक पचीस का पहला उद्देशा उदेशे के अर्थ संग्रहण लेsया के स्वरूप का निरूपण संसार समापचक जीव के स्वरूप का निरूपण चौदह प्रकार के संसार समापत्रक जीवों के योग और उनके अल्पवदुख का निरूपण नैरों के सम और विषम योगपने का निरूपण प्रकारान्तर से योग के स्वरूप का निरूपण दूसरा उद्देशा द्रव्य प्रकारों के परिमाण आदि का निरूपण जीवाजीव ब्रव्यों के परिभोग का निरूपण असंख्य लोक में अनन्त द्रव्य का समावेश आदि का निरूपण स्थितास्थित द्रव्य ग्रहण का निरूपण तीसरा उद्देशा संस्थानों का निरूपण रत्नममा आदि पृथिवी की अपेक्षा से संस्थानों का निरूपण प्रदेश और अवगाहना की अपेक्षा से શ્રી ભગવતી સૂત્ર : ૧૫ संस्थानों का निरूपण पार्था से संस्थानों का निरूपण द्रव्यादिक की अपेक्षा से लोकके परिमाण आदि का निरूपण श्रेणियों के सादिव आदि का निरूपण मकारान्तर से श्रेणियों का निरूपण नैरयिक आदि के अल्पबहुत्व का निरूपण ५२०-५२३ ५२४-५२७ ५२८-५२९ ५३० ५४१ ५४२-५४७ ५४८-५५६ ५६७-५६४ ५६५-५७१ ५७२-५७५ ५७६-५९२ ५९३ - ६०४ ६०५-६२१ ६४५-६७९ ६४५-६७६ ६७७-६८० ६८०-७०७ ७०८-७२० ७२१-७३२
SR No.006329
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Part 15 Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhasilal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1971
Total Pages969
LanguageSanskrit, Hindi, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, & agam_bhagwati
File Size57 MB
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