________________
106000wwwwwwwwwwwww
जाहाण
ब्राह्मण जाति सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। किन्तु ब्राह्मण कौन- इस विषय में जिज्ञासा स्वाभाविक है। क्या उसे जन्म-आधारित विशेषता माना जाए या गुण-विशेषों के आधार पर इसका निर्धारण किया जाय, इस संबंध में जैन व वैदिक- दोनों धर्मों में जो विशिष्ट चिन्तन हुआ है, वह प्रस्तुत है।
(1) तवस्सियं किसंदंतं, अवचिय-मंस-सोणियं। सुव्वयं पत्तनिव्वाणं, तं वयं बूम माहणं॥
(उत्तराध्ययन सूत्र-25/22) -- जो तपस्वी, कृश एवं जितेन्द्रिय है, तप, साधना से जिसने अपना रक्त और मांस सुखा दिया है, जो सुव्रती है, जिसने क्रोध, मान, माया तथा लोभ से मुक्ति पा ली है, उसे हम 'ब्राह्मण' कहते हैं।
(2) तसे पाणे वियाणित्ता, संगहेण च थावरे। जो न हिंसइ तिविहेणं, तं वयं बूम माहणं॥
(उत्तराध्ययन सूत्र-25/23)
तृतीय खण्ड/431