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(3) कामा दुरतिक्कमा।
(आचारांग सूत्र-1/2/5) - कामनाएं दुरतिक्रमणीय हैं, अर्थात् उनकी पूर्ति कर पाना दुष्कर कार्य है।
(4) कामः समुद्रमाविवेश।
(अथर्ववेद-3/29/7) - काम समुद्र में प्रविष्ट होता है, अर्थात् कामनाएं समुद्र के समान असीम होती जाती हैं, उनका अन्त नहीं होता।
(5) समुद्र इव कामोऽपरिमितः।
(काठक संहिता- 9/12) - समुद्र की तरह असीम-अनन्त होता है- काम।
___(6) इच्छा हुआगाससमाअणंतिया।
' (उत्तराध्ययन सूत्र-9148) - इच्छा-कामनाएं आकाश के समान अनन्त हैं।
(7) कामाणुगिद्धिप्पभवंखुदुक्खं।
(उत्तराध्ययन सूत्र-32/19) - प्राणियों को जो दुःख है, वह विषय-भोग सम्बन्धी तृष्णा के कारण उत्पन्न है।
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