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अहिंसा आदि महाव्रत
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आध्यात्मिक साधना के लिए संयम का मार्ग ही उपादेय होता है। इस मार्ग में कुछ मौलिक नियमों का पालन अत्यावश्यक होता है। इन नियमों को व्रत या महाव्रत के नाम से जाना जाता है। अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य व अपरिग्रह- ये पांच महाव्रत हैं, जिन्हें वैदिक व जैन- इन दोनों परम्पराओं में समानतया अंगीकार किया गया है।
(1) अहिंस सच्चं च अतेणगं च, ततो य बंभं अपरिग्गहं च। पडिवज्जिया पंच महव्वयाणि, चरिज धम्मं जिणदेसियं विऊ॥
(उत्तराध्ययन सूत्र-21/12) - अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह –इन पांच महाव्रत रूप जिनदेशित धर्म का आचरण विद्वानों को करना चाहिए।
गीय सण्ड/375