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________________ - श्री परमात्मने नमः = सद्धर्म-बोध । मंगलाचरणम् । परमेश्वरं नमस्कृत्य । धर्मबोधादिदायकः ॥ वक्ष्यं आत्मोद्धारार्थं ! ग्रन्थः सद्धर्मबोधकः ॥ १ ॥ प्रथम धर्मोपदेशक सदबोधके कर्ता श्री परमेश्वरको नम्रतापूर्वक नमस्कार करके स्वात्म व परमात्माके उद्धारार्थ इस सद्धर्म बोध ग्रंथका प्रारंभ करता हूं। यह सब जीवोंके हितका कर्ता बने । मनुष्य और पशु में भिन्नता । आहारनिद्राभयमैथुनानि, तुल्यानि साधं पशुभिर्नराणाम् । धर्मो विशेषः खलु मानुषाणां, धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः ॥ १ ॥ सर्व अवतारिक महापुरुषोंने और सर्व शास्त्रोंने सर्व जीवायोनीमें मनुष्य जन्मके प्राप्तीकी दुर्लभता, अत्यंत आवश्यकता और सबसे परमोत्कृ
SR No.006293
Book TitleSaddharm Bodh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherNanebai Lakhmichand Gaiakwad
Publication Year1863
Total Pages98
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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