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________________ ४१ आपवानी होय त्यांना श्री संघनी संमतिथी योग्य जाहेरात पछी दीक्षा आपवी. पाछळथी अमदावादमां भरायेला साधुसंमेलने दक्षिा बाबत जे धोरणो अन नियंत्रणो नक्की को हतां तेनी सरखामणीमां आ ठराव बहु ज नम्र, संयमशील अने मोळो छतां तेनी सामे जे जब्बर ऊहापोह थयो ए पण एक कोयडो ज छे. चौदमुं अधिवेशन-मुंबई ___ कॉन्फरन्सनुं चौदमुं अधिवेशन मुंबई मुकामे सं. १९९०ना प्रथम चैशाख वद ७-८-९, ता. ५-६-७ मे सन १९३४ना दिवसोमां बाबुसाहेब निर्मलकुमारसिंहजी नवलखाना प्रमुखपदे मळ्युं हतुं. स्वागतप्रमुख तरीकेनी जवाबदारी श्रीमान अमृतलाल कालीदास शेठे संभाळी हती. जुन्नेर कॉन्फरन्स पहेलां अने पछी आखाए समाजमां जे कुसंपर्नु वातावरण व्याप्त थयुं हतुं अने तड पडी गया हता ते सांधवा, समाजमां पुनः ऐक्यनी स्थापना करवा अने शासनपक्षना बंधुओ कॉन्फरन्सना मुंबई अधिवेशनमां भाग ले ते माटे शेठ अमृतलाल काळीदास अने अन्य कार्यकर्ताओए तनतोड प्रयत्नो कॉन्फरन्सचें अधिवेशन मळता पहेलां कर्या हता. स्वागतप्रमुख पोताना भाषणमां तेनो उल्लेख करतां का के, "बधा पक्षो वच्चे ऐक्य प्रसराववा वास्ते, ज्यारथी कॉन्फरन्स भरवानो निरधार थयो त्यारथी में माराथी बनी शकता दरेक प्रयत्नो छेक हेल्ली घडी सुधी कर्या छे. प्रयत्नो करवामां में मारा मानापमाननी दरकार राख्या सिवाय, दरेक पक्षने समजाववामां मारी छेल्लामा छेल्ली शक्ति अने लागवगनो उपयोग कर्यो छे, पण गृहस्थो, कहेवाने हुं दिलगीर छु के तेनुं परिणाम आशाजनक आव्यु नथी." Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005582
Book TitleJain Shwetambar Conferenceno Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNagkumar Makatai
PublisherSohanlal Madansinh Kothari
Publication Year1960
Total Pages216
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size14 MB
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