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________________ निवासी रायबहादुर बुधसिंघजी दूधोडियाना प्रमुख पदे मळ्यु हतुं. वडोदराना श्री संघे सरकारी डंको, निशान, हाथी, घोडा, बगीओ, वाजिंत्रो वगरेथी प्रमुखश्रीनो सत्कार स्टेशने कर्यो हतो. प्रमुख साहेब तेमना भत्रिजा बाबु विजयसिंघजी साथे दबदबाभरेला पोषाकमां हाथी उपर चांदीनी अंबाडीमा बिराज्या हता. तेमनो उतारो सरकारी बंगले हतो अने तेमनी तहेनातमा सरकारी बगीओ अने स्वारो राखबामां आव्या हता. स्वागत प्रमुख झवेरी श्री फते. भाइ अमीचंदना आवकारना भाषण बाद अधिवेशननुं उद्घाटन वडोदराना प्रजाप्रिय प्रगतिशील उदारचरित नृपति श्रीमंत सयाजीराव गायकवाडना शुभ हस्ते थयुं हतुं. तेओ श्रीमंत, महाराणी साहेब तथा राजकुंटुंबसह पधार्या हता अने अधिवेशननी जुदी जुदी बेठकोमा हाजरी आपी सौने प्रोत्साहित कर्या हता. श्री. सयाजीरावे पोताना उद्घाटन-भाषणमां जणाव्युं के, जैनधर्म घणो जूनो छे, बौद्ध धर्म करतां पण जूनो छे. आ एवो सादो धर्म छे के जेने हयाती भोगवतां हजारो वर्ष थइ गयां अने हजारो-मत पंथ थइ गया तो पण ते हयाती भोगवे छे त्यारे तेमां अवश्य कंइ उच्चता होवी जोइए. जो तेम न होय तो ते अदृश्य थात. मांस न खावु तथा अहिंसा परमो धर्म ए जेनो मुख्य सिद्धांत छे, तेबा धर्मनो तमे तमारा वच्चे मजबुताइथी प्रचार करो एटलं ज नहीं पण परदेशमां तेनो प्रचार करवा प्रयत्न करो. तमारा जैनवर्ग पैकीनो घणो भाग वेपारी छे, अने परमेश्वरे तमने जे कंइ संपत्ति आपी होय तेनो सदुपयोग करी संसारमा पोतानी अने सर्वनी सारी रीते उन्नति थाय तेम करवू जोइए. Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005582
Book TitleJain Shwetambar Conferenceno Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNagkumar Makatai
PublisherSohanlal Madansinh Kothari
Publication Year1960
Total Pages216
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size14 MB
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