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________________ पृथ्वी-आकार तथा विज्ञान-स्वीकृत पृथ्वी की धारणा से भी संगति बैठ जाती है । ६ आकार के मध्य इस अन्तर को समाप्त यहां यह उल्लेखनीय है कि 'झल्लरी' करने के लिए जैन विद्वानों द्वारा विविध पद का 'झांझ' (बाद्य) अर्थ में प्रयोग जैन प्रयत्न किये जा रहे है । यह प्रयत्न द्विमुखी आगम 'स्थानांग' में उपलब्ध भी होता हैं । एक पक्ष के प्रवर्तकों का यह प्रयत्न है । ७ विद्वानों के समक्ष यह समाधान रहा है कि जैनागमों की ही ऐसी व्याख्या विचारणार्थ प्रस्तुत है । की जाए जिससे जैन मत या तो आधुनिक (ख) फ्लैट-अर्थ सोसाइटी व अन्य संस्थाएं: विज्ञान के कुछ निकट आ जाए, या समर्थित (२) दूसरे पक्ष की ओर से समाधान हो जाए । दूसरे पक्ष के समर्थकों का यह यह प्रस्तुत किया जाता है कि विज्ञान की प्रयत्न रहा हैं कि विज्ञान के मतों को अनेक मान्यता अंतिम रुप तो मानी नहीं जा युक्तियों से सदोष या निबल सिद्ध करते हुए जैन-सम्मत सिद्धान्तों की निर्दोषता या सकती । विज्ञान तो एक अनवरत अनुस न्धान-प्रक्रिया का नाम है । १ विज्ञान के प्रबलता प्रकट हो । इन दोनों पक्षों को दृष्टि - में रख कर, विज्ञान व जैन मत के वीच ६. युवाचार्य महाप्रज्ञ मुनि नथमल जी विरोध का समाधान यहां प्रस्तुत किया जा का मत, (द्र० तुलसीप्रज्ञा) (शोध पत्रिका), रहा है। लाडनू, अप्रैल-जून,१९७५, पृ० १०६)। ७. मज्झिम पुण झल्लरी (-झांझ से मध्यम (क) झल्लरी व स्थाली शब्दों के अर्थ : स्वर की उत्पत्ति होती है)-स्थानांग-७/४२ 1. "Science is a series of approxi (१) प्रथम पक्ष की ओर से यह समा mations to the truth; at no sta ge do we claim to have reached धान प्रस्तुत किया जाता है कि जैन शास्रों finality, any theory is liable to में पृथ्वी की उपमा 'झल्लरी' या 'स्थाली' से revision in the light of new facदी जाती हैं । आज 'स्थाली' शब्द से भोजन ts" (A. W. Barton, quoted in करने की थाली, तथा 'झल्लरी' शब्द से 'Cosmology : Old and New', झालर का बोध मानकर जैन परम्परा में Prologue, p. III). पृथ्वी को वृत्त व चिपटी माना गया है । "Scientific theories arise, किन्तु झल्लरी' का एक अर्थ 'झांझ' वाद्य भी develop and perish. They have होता है, और 'स्थाली' का अर्थ खाने पकाने their span of life, with its succ esses and triumphs, only to give ही हंडिया (बर्तन) भी । ये अर्थ आज way later to new ideas and a व्यवहार में नहीं है । यदि झांझ व हडिया new outlook.” (Lcopold Infeld अर्थ माना जाए तो पृथ्वी का गोल होना in "The world in Modern Scieसिद्ध हो जाता है और आधुनिक विज्ञान । nce.”, p. 231). Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005569
Book TitleJambudwip Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhaman Jain Pedhi
PublisherVardhaman Jain Pedhi
Publication Year
Total Pages250
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size6 MB
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