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________________ (१२) इन्हीं पवित्र महान् पुरुषोंके जीवनमें अमलीसूरत इख्त्यिार करती हुइ नजर आती है. ये दुनियांके जबरदस्त रिफॉर्मर, जबरदस्त उपकारी और बडे ऊंचे दर्जेके उपदेशक और प्रचारक गुजरे है । यह हमारी कौमी तवारिख ( इतिहास ) के कीमती (बहु मूल्य ) रत्न हैं । तुम कहां और किसमें धर्मात्मा प्राणीयोंकी खोज करते हो ? इन्हीं कों देखो, इनसे बेहतर ( उत्तम ) साहबे कमाल तुमको और कहां मिलेंगे ? । इनमें त्याग था, इनमें वैराग्य था, इनमें धर्मका कमाल था, यह इन्सानी कैमजोरियों से बहुतही उचे थे, इनका खिताब " जिन" है. जिन्होंने मोहमायाको जीत लिया था, यह तीर्थंकर हैं, इनमें बनावट नहीं थी. जो बातथी साफ साफथी. ये वह लासानी ( अनौपम ) शखसीयतें हो गुजरी हैं. जिनको जिसमानी कमजोरियों व ऐवोंके छिपानेके लिये किसी जाहिरी पोशाककी जरूरत लाहक नहीं हुई क्योंकि उन्होंने तप करके जप करके १ वहि अमल करनेवाली मूर्तियां ।। २ महापुरुषो । ३ माणस तरीकेकी कमजोरीयांसें । ४ बेसक । Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005250
Book TitleJainetar Drushtie Jain
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmarvijay
PublisherDahyabhai Dalpatbhai
Publication Year1923
Total Pages408
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size13 MB
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