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________________ मालव देशना चंम्प्रद्योत नामे राजाने देवाधिदेवनी प्रतिमा पानी लाववा माटे उत्पन्न थयेला संग्राममां बांधीने पाना श्रावतां दशपुर नगरमां चोमासु रह्यो. वार्षिक पर्वने दिवसे राजाए पोते 8 उपवास को. राजाए हुकम करेला रसोयाए जोजन माटे चंप्रद्योतने पूज्यु. त्यारे विषनी ६ बीकथी “हुँ श्रावक हुँ तेथी मने पण बाजे उपवास डे" एम को बते"श्रा धूर्त साधर्मिकने पण खमाव्या है वगर मारु प्रतिक्रमण शुद्ध थशे नहीं” एम उदयन राजाए धारीने तेनुं सर्वख पालुं श्रापीने थने तेना कपाल उपर लखावेला 'मारीदासीनो पति' ए अदरो थाछादन करवा माटे पोतानो मुकटपट्ट थापीने श्री उदयन राजाए चंम्प्रद्योतने खमाव्यो. अहीं श्री उदयन राजानुं तेना उपशांतपणाथी आराधकपणुं जाणवू. है। कोई वखते बनेनुं श्राराधकपणुं होय . ते था प्रमाणे-एक वखत कौशाम्बी नगरीने विषे सूर्य है अने चंड पोतानां विमान वमे श्री वीर प्रजुने वांदवाने थाव्या. चंदना साध्वी दक्षपणाने सीधे श्रस्तसमय जाणीने पोताने स्थाने गया अने मृगावती सूर्य चंजना जवाथी अंधकार फेलाये बते | रात्रि जाणीने बीती थकी उपाश्रये आवी अने पथिकी प्रतिक्रमीने सूतेला एवा चंदना साध्वीने 'मारो अपराध दमा करो' एम कहेवा लागी. त्यारे चंदनाए पण 'हे न ! तारा जेवी | कुलीनने थाम करवू ते युक्त नथी' ए प्रमाणे कयु. तेणे वली कयु के 'फरीथी थाम करीश नहीं एम कहीने पगे पडी. एटलामां चंदना साध्वीने उघ श्रावी ग अने मृगावतीने ते प्रकारे खमा वतां केवलज्ञान प्राप्त थयु. पनी को सर्प नजीक श्राववाथी चंदनानो हाथ जंचो लेवाना बना-8 ६ वथी चंदना साध्वी जागी गया अने केवी रीते सर्प जाएयो एम पूढतां चंदनाए मृगावतीने केवल झान थयेवू जाणीने तेणीने खमावतां पोते पण केवलज्ञान मेलव्यु; तेथी भावी रीते मिथ्या पुष्कृत है देवू जोइए, पण कुंचार श्रने कुबकना दृष्टांते देवु न जोश्ए. ते कुंनार अने कुल्लकनो दृष्टांत श्रा, प्रमाणे बे- (कुंचारनां ) हांझलां काणां करता को एक कुखक (चेला)ने कुंजार ज्यारे निवारतो Jain Educati For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005230
Book TitleSubodhika Kalpasutra Tika Gujarati Bhashantar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVinayvijay
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year1915
Total Pages414
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati, Agam, Canon, & agam_kalpsutra
File Size16 MB
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