________________ ( 178 ) ___ 'श्रीमद् भद्रबाहु स्वामी कृत व्यवहार सूत्र चूलिका छेज नहिं . . ."ए तो संतवाल रचित छे...."बिलकुल जाली तथा नवीन सूत्र छे...... कल्पित छे ..... "आदि / यद्यपि इन महात्मा का उक्त कथन एकान्त मिथ्या है, तथापि इन की दूरदर्शिता का पूर्ण परिचायक यदि ये ऐसा नहीं करे तो कथित मूर्ति पूजा की कलितता स्पष्ट होकर इनकी जमी हुई जड़ खोखली होजाय इसके सिवाय ( उक्त ग्रन्थ को कल्पित कहे सिवाय) इनके पास अपने बचाव का दूसरा मार्ग भी तो नहीं है। . अब यह लेखक न्याय का गला घोंटने वाले इन न्याय विजयजी के उक्त लेख को मिथ्या लिद्ध करने के लिये इन्हीं के मतानुयायी और हमारे पूर्व परिचित मूर्ति-मंडन प्रश्नोतरकार के निम्न लिखित प्रमाण देता है, कि जिन्हें देखकर श्रीन्यायविजयजी को व्यवहार सूत्र की चूलिका श्री भद्रबाहु स्वामी रचित है ऐसा सत्य स्वीकार ने की सूझे / और जनता इनके असत्य कथन पर विश्वास नहीं कर प्र. माण युक्त सत्यंबात को स्वीकार करें, देखिये, मूर्ति मंडन प्रश्नोत्तर (1) श्री भद्रबाहु स्वामीए पण श्री व्यवहार चूलिका मां प्रविधिनो निषेध करी विधिनो आदर कर्मो छ। (पृ०२६३) (2 श्री भद्रश स्वामी वली व्यवहार सूत्र नी चूलिका मां चोथा स्वप्न ना अर्थ मां कहे के के .......' (पृ. 264) . (3) श्री भद्रबाहु स्वामीए व्यवहार सूत्र नी चूलिका मां द्रव्य लिंगी चैय स्थापन करवा. ल गीजरोत्यां मूर्ति स्थापना नो अर्थ कयों छे, ( पृ० 286