________________ 20-- हुराडी से मूर्ति की साम्यता प्रश्न-जब कोई धनी व्यापारी अपनी किसी विदेश स्थित दुकान के नाम किसी मनुष्य को हुण्डी लिखदे तब वह मनुष्य उस हुण्डी के जरिये लिखित रुपये प्राप्त कर स. कता है, बताई ये यह स्थापना निक्षेप का प्रभाव नहीं तोक्या है ? हुण्डी में जितने रुपये देने के लिखे हैं वह रुपयों की स्थापना नहीं है क्या? उत्तर-उक्त कथन स्थापना निक्षेप का उलंघन कर गया है, सर्व प्रथम यह ध्यान में रखना चाहिये कि स्थापना निक्षेप साक्षात् की मूर्ति चित्र अथवा कोई पाषाण खण्ड श्रा. दि है, जिसमें साक्षात् की स्थापना की गई हो आपने इस प्रश्न में साक्षात् को ही स्थापना का रूप दे डाला है, क्योंकि हुण्डी स्वयं भाव निक्षेप में है, हुण्डी लेने वाले को उसमें लिखे हुए रुपये चुकाने पर ही प्राप्त हुई है, और हुण्डी जभी शिकरेगी कि उसका भाव (लिखने और शिकारने वाले साहू कार) सत्य हों।