________________ ( 244 ) आगम और तत्वज्ञान / 38 श्रीउत्तराध्ययनसूत्र भाग १-श्रीकमलसंयमोपाध्याय की बनाई हुई सर्वार्थसिद्धि नाम की टीका युक्त तो यह ग्रन्थ सर्व प्रथम ही हमारे यहां से प्रकाशित होता है / इस सूत्र और टीका में कई सुन्दर 2 कथाएँ आती हैं, अच्छे कागजों में छपा है। शान्तमूर्ति मुनि श्रीजयन्तविजयजी महाराजने इसको सपरिश्रम एडिट किया है। पत्राकार में मूल्य रु० 3--0 39 श्रीउत्तराध्ययनसूत्र भाग 2 , , मूल्य 3-8-) 40 , , भाग 3 , , , 3-8-0 41 " " भाग ,4 (छप रहा है) इस भाग में यह पूर्ण होगा. 42 विशेषावश्यकभाष्य (सटीक) पत्राकार-श्रीजिनभद्रगणि महाराजने आगम पद्धति से इस महाग्रन्थ को मूल प्राकृत में बनाया है / इस में आगमज्ञों और तार्किकों को बहुत आनन्द देने योग्य अनेक विषयों की चर्चा है / ज्ञान के विषय में इस ग्रन्थ से बहुत विस्तारपूर्वक जानने को मिलता है / इसके ऊपर प्रसिद्ध टीकाकार मलधारि श्रीहेमचन्द्रने बहुत ही विस्तृत और अत्युत्तम संस्कृत टीका बनाई है। पत्राकार पृष्ट 1623, मूल्य 50-0-0 सिर्फ थोडी ही नकले सिलिक में हैं.