________________ ( 242 ) ऊपर स्वोपज्ञ विस्तृत टीका बनाई है, वह बहुत ही उपयोगी है / डॉ० याकोबी का मत है कि पिङ्गलकृत पिङ्गल सूत्र से इस में कुछ छन्दः ज्यादा हैं और लेखनशैली सुन्दर एवं सरल है / पत्राकार इस ग्रन्थ का मूल्य रु. 1-0-0 . इतिहास / 34 गुर्वावली-कालिदासतुल्य, संहस्रावधानी श्रीमुनिमुन्दर सुरि महाराजने भगवान् महावीर के बाद होनेवाले अनेक गणधर आचार्यों की सत्ता-समयादि पूर्वक पट्टावली (परंपरा), अपने समय यानी पन्द्रहवीं शताब्दी तक का वृत्तान्त इतिहास और काव्य दोनों दृष्टि से, लिखी है / प्रथमावृत्ति खतम होने से हमने इसकी दूसरी आवृत्ति छपवाई है। इतिहासज्ञों को तो यह बहुत ही काम की चीज़ है / पृष्ठ 54, मूल्य 0-4-0 स्तोत्र। 35 श्रीजैनस्तोत्रसंग्रह (द्वितीय भाग)-इस भाग में भक्तामर कल्याणमन्दिर स्नातस्याप्रतिमस्य-संसारदावादि की पादपुर्तिवाले, यमकादि विचित्रालंकारवाले, भक्ष्य चीज के