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________________ ( 89) है, उसमें भी कितना अधिक परिवर्तन हुआ है ? क्या कोई कह सकता है कि हमारे 'प्रतिक्रमण' जैसे भगवान महावीर स्वामी के समय में होते थे वैसे ही (बिना परिवर्तन के ) अब भी होते हैं ? नहीं। प्रतिक्रमण में बोले जाने वाले सूत्रों को ऐतिहासिक दृष्टि से अवलोकन करने वाले स्पष्टतया कहेंगे कि "सकलार्हत्, स्नातस्या, लघुशान्ति,अजितशान्ति,संसारदावा,सतिकरं, बृहच्छान्ति, वगैरह तथा चैत्यवंदन एवं स्तुतिस्तोत्रादि वार्तमानिक प्रतिक्रमणों में बोले जाते हैं वे उनके रचनाकार महात्माओं के पूर्व प्रतिक्रमणों में नहीं थे / " 'सकलार्हत्' के रचियता कुमारपालभूपालप्रतिबोधक आ० श्री हेमचन्द्र सूरि हैं / वे १२वी शताब्दि में हुए हैं / अतः कहना पड़ेगा कि प्रतिक्रमण में अब जो सकलार्हत् बोला जाता है वह श्री हेमचन्द्राचार्य की उपस्थिति में अथवा उनके बाद प्रतिक्रमण में बोलना प्रारम्भ हुआ है 'स्नातस्या' की स्तुति के कर्ता श्री हेमचन्द्राचार्य के शिष्य बालचन्द्र है अतः इसका प्रारम्भ बाद में हुआ है / 'संसारदावा' की स्तुति के कर्ता श्रीहरिभद्रसूरि महाराज है अतएव स्पष्ट है कि संसारदावा की स्तुति श्री हरिभद्रसूरि महाराज के समय में अथवा उनके पश्चात् प्रतिक्रमण में बोलनी प्रारम्भ हुई। इसी प्रकार लघुशान्ति, बृहच्छान्ति, वगैरह के लिये भी समझ लेना चाहिये / इससे क्या सूचित होता
SR No.004448
Book TitleDevdravya Sambandhi Mere Vichar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDharmsuri
PublisherMumukshu
Publication Year
Total Pages130
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Devdravya
File Size6 MB
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