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________________ प्रो. सागरमल जैन एवं डॉ. सुरेश सिसोदिया : 191 26. वही, अष्टम अध्ययन 27. वही, नवम अध्ययन 28. वही, दसवां अध्ययन 29. गाहावई समणोवास यावि होत्था । • सुत्तागमे (सुयगडांग), सूत्र 2/7 णो खलु वयं संचारमो मुण्डा भवित्ता अगाराओ । सावयं ण्हं अणुपुण्वेणं सुत्तस्स लिसिस्सामो। - वही, सूत्र 2/7 30. चरित्तधम्मे दुविहे अगारचरित धम्मे चेव अणगार चरित्त धम्मे । ठाणं (सुत्तागमे), 2/1/188 — चत्तारि समणो वासगा पण्णत्ता .... वही, 4/3/406 31. एक्कारस उवासग पडिमाओ.... समवाए। (सुत्तागमे), पृष्ठ 324 "समणभूए आविभवइ समणाउसो'' वही, पृष्ठ 324 32. सोच्चा णं केवलिस्स व केवलिसावगस्स वा केवलिसावियाए वा केवलिउवासगस्स.... । भगवई (अंगसुत्ताणि, भाग 2), 5/96 33. देवाणुप्पिआणं अंतिए पच्चाणुव्वइयं जाव समणोवासए। ज्ञाताधर्मकथा (शोभाचंद्रभारिल्ल), 5/ पृष्ठ 190. 34. उवासगदसाओ (मधुकर मुनि), 1/70, 1/12, 1/11, 2/92 35. से मोग्गर पाणी जक्खे सुदंसणं समणोवासयं... I - अंतगडदसाओ (सुत्तागमे), 6/3 पृष्ठ1197 36. उवासगाण पडिमासु भिक्खुण पछिमासु य जे भिक्खु जयइ णिच्चसेन अच्छइ मण्डले। Jain Education International - उत्तराध्ययनसूत्र, 31/11 37. दुविह संजमचरणं सायारं तह हवे णिरायारं । 38. मूलोत्तरगुण...... श्रावकः पिपासुः स्यात् । - चारित्र पाहुड, गाथा 22 . धर्मामृत (सागार), 1/15 39. सम्मत्त विसुद्धमई सो दंसण सावयो भणिओ। For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004256
Book TitleAng Sahitya Manan aur Mimansa
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSagarmal Jain, Suresh Sisodiya
PublisherAgam Ahimsa Samta Evam Prakrit Samsthan
Publication Year2002
Total Pages338
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size24 MB
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