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________________ चतुर्थ अध्याय 71 लोक निवास अधोलोक अधोलोक | * असुरकुमार * राक्षसरत्नप्रभा पृथिवी/ रत्नप्रभा पृथ्वी के | चार निकाय के देवों का निवास | निकाय भवनवासी व्यंतर लोक | * अधोलोक * अधोलोक * मध्यलोक | * ऊर्ध्व * मध्यलोक * मध्यलोक | *चित्रा पृथिवी * सौधर्म स्थान से 790 योजन| स्वर्ग के | पंक भाग में ऊपर से 900 | प्रथम पटल योजन तक है | के विमान से * शेष 9 प्रकार रत्नप्रभा पृथ्वी के * तिर्यक् रूप | प्रारम्भ कर - रत्नप्रभा . खर भाग में से घनोदधि । सर्वार्थसिद्धि पृथिवी के मध्यलोक | वातवलय तक विमान तक खरभाग में * भवन भवनपुर है मध्यलोक और आवास के पंक भाग में * शेष 7 प्रकार । * असुर कुमार * चित्रा पृथिवी पर | भवनों में द्वीप, पर्वत, समुद्र, * शेष 9 प्रकार देश, ग्राम, नगर. गृहों के आँगन, - भवन, रास्ता, गली, बाग, भवन पुर और वन आदि में आवासों में Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004253
Book TitleTattvartha Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPuja Prakash Chhabda
PublisherJain Sanskruti Samrakshak Sangh Solapur
Publication Year2010
Total Pages258
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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