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________________ लिंग द्वार ४५ प्रश्न - पुलाए णं भंते ! किं सलिंगे होज्जा, अण्णलिंगे होज्जा, गिहिलिंगे होजा ? ४५ उत्तर - गोयमा ! दव्वलिंगं पडुच्च सलिंगे वा होज्जा, अण्णलिंगे वा होज्जा, गिहिलिंगे वा होज्जा, भावलिंगं पडुच्च णियमा सलिंगे होना, एवं जाव सिणाए ९ । भावार्थ - ४५ प्रश्न - हे भगवन् ! पुलाक, स्वलिंग में, अन्यलिंग में या गृहस्थलंग में होते हैं ? . ४५ उत्तर - हे गौतम! द्रव्यलिंग की अपेक्षा स्वलिंग, अन्यलिंग में या गृहस्थलंग में होते हैं, किंतु भाव लिंग की अपेक्षा नियम से स्वलिंग में हो होते हैं। इसी प्रकार यावत् स्नातक पर्यन्त । विवेचन-लिंग के दो भेद हैं- द्रव्यलिंग और भावलिंग । सम्यग्ज्ञान-दर्शन- चारित्र भावलिंग है । यह भावलिंग केवलिप्ररूपित धर्म का पालन करने वालों में ही होता है । अतः यह स्वलिंग कहलाता है । द्रव्यलिंग के दो भेद हैं- स्वलिंग और अन्यलिंग ( पर लिंग ) । हाथ में रजोहरण रखना, मुख पर मुखवस्त्रिका बांधना, इत्यादि द्रव्य से स्वलिंग हैं । परलिंग के दो भेद हैं- कुतीर्थिक लिंग और गृहस्थलिंग । पुलाक में तीनों प्रकार के द्रव्यलिंग पाये जा सकते हैं, क्योंकि चारित्र का परिणाम किसी एक ही द्रव्यलिंग की अपेक्षा नहीं रखता । Jain Education International शरीर द्वार ४६ प्रश्न - पुलाए णं भंते ! कइसु सरीरेसु होज्जा ? ४६ उत्तर - गोयमा ! तिसु ओरालिय- तेया- कम्मरसु होजा । भावार्थ - ४६ प्रश्न - हे भगवन् ! पुलाक कितने शरीर में होते हैं ? For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004092
Book TitleBhagvati Sutra Part 07
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhevarchand Banthiya
PublisherAkhil Bharatiya Sudharm Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year2006
Total Pages692
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size11 MB
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