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________________ भगवती गूत्र-श. १० उ. ५ व्यन्तरेन्द्रों का परिवार १८३२ २२ प्रश्न-गीयरइम्म णं पुन्छ । २२ उत्तर-अजो ! चत्तारि अग्गमहिसीओ पण्णत्ताओ, तं जहा--१ सुघोसा २ विमला ३ सुस्सरा ४ सरस्सई । तत्थ णं सेमं तं चेव । एवं गीयजमस्स वि । सव्वेसिं एएसि जहा कालस्म णवरं मरिसणामियाओ रायहाणीओ सीहासणाणि य, सेसं तं चेव । कठिन-शब्दार्थ-वसा-अवतंसा, फुडा--म्फटा । भावार्थ-१९ प्रश्न-हे भगवन् ! किन्नरेन्द्र के कितनी अग्रमहिषियाँ .. कही गई हैं ? १९ उत्तर-हे आर्को ! चार अग्रमहिषियाँ कही गई हैं । यथा-अवतंसा, केतुमती, रतिसेना और रतिप्रिया । प्रत्येक देवी के परिवार के विषय में पूर्वोक्त रूप से जानना चाहिये । इसी प्रकार किम्पुरुषेन्द्र के विषय में भी जानना चाहिये। . २० प्रश्न-हे भगवन् ! सत्पुरुषेन्द्र के कितनी अग्रमहिषियाँ कही गई हैं ? . २० उत्तर-हे आर्यो ! चार अग्रमहिषियाँ कही गई हैं। यथा-रोहिणी, नवमिका, ह्री और पुष्पवती । प्रत्येक देवी के परिवार का वर्णन पूर्वोक्त रूप से जानना चाहिये । इसी प्रकार महापुरुषेन्द्र के विषय में भी जानना चाहिये। २१ प्रश्न-हे भगवन् ! अतिकायेन्द्र के कितनी अग्रमहिषियाँ कही गई हैं ? २१ उत्तर-हे आर्यो ! चार अग्रमहिषियाँ कही गई हैं । यथा-भुजंगा, भुजंगवती, महाकच्छा और स्फुटा । प्रत्येक देवी के परिवार का वर्णन पूर्वोक्त रूप से जानना चाहिये । इसी प्रकार महाकायेन्द्र के विषय में भी जानना चाहिये। २२ प्रश्न-हे भगवन् ! गीतरतीन्द्र के कितनी अग्रमहिषियाँ कही गई हैं ? २२ उत्तर-हे आर्यो ! चार अग्रमहिषियाँ कही गई हैं। यथा-सुघोषा, Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004089
Book TitleBhagvati Sutra Part 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhevarchand Banthiya
PublisherAkhil Bharatiya Sudharm Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year2006
Total Pages578
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size10 MB
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