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________________ नीतिशास्त्र का उद्गम एवं विकास (ORIGIN AND DEVELOPMENT OF ETHICS) भारतीय नीतिधारा (1) अंग्रेजी में एक लोकोक्ति है-- Necessity is the mother of invention. (आवश्यकता आविष्कार की जननी है ।) मानव का स्वभाव है कि जब तक जीवन यात्रा सुख-सुविधापूर्वक चलती रहती है, उसकी किसी भी नई बात में अथवा ज्ञान-विज्ञान की ओर रुचि नहीं होती। रोग औषधि विज्ञान का जनक है तो कठिनाइयों, परेशानियों, अधिक श्रम ने प्रौद्योगिकी का विकास किया है। __ ज्यों-ज्यों नये रोग उत्पन्न होते हैं, चिकित्सा विज्ञान उन रोगों के शमन के उपाय खोजता है और इस प्रकार विकसित तथा उन्नत होता चला जाता है। जब तक मानव का जीवन ग्रामीण व्यवस्था से संचालित था, उसे अधिक दूर तक नहीं जाता पड़ता था तब तक यातायात के साधनों का विकास नहीं हुआ; किन्तु जब व्यापार आदि के लिए, अन्य राज्यों को विजित करने अथवा भ्रमण या अन्य संस्कृतियों को जानने की आवश्यकता हई तो द्रुतगामी साधन भी अस्तित्व में आए । घोड़े और रथों से उन्नति करता हुआ आज का युग स्कूटर, मोपेड, कार, हवाई जहाज से बढ़कर स्पूतनिक और जम्बो जेट विमानों तक आ पहुँचा है। युद्ध और शस्त्र-विज्ञान की प्रगति का भी यही रहस्य है । . ( १५ ) Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004083
Book TitleJain Nitishastra Ek Parishilan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDevendramuni
PublisherTarak Guru Jain Granthalay
Publication Year1988
Total Pages556
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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