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________________ अनुपूर्ति-लेखा : मंडिलिक जड़ता । समस्त पूर्वज निमित (तं ) ॥ श्रीपार्श्वनाथबिंबं कारापितं प्रतिष्टि (ष्ठित पास सूरिभिः ( १९० ) पंचतीर्थो सं[०] १४३३ अषाढ शुदि १० हुंबड ज्ञा० पितृ छाडा भा० गउरदे लाषण श्रेयसे श्री संभवबिंबं का प्रतिष्ठितं श्रीसर्वाणिदसूरिभिः ( १९१ ) पंचतीर्थी ५४७ सं० १४३४ वर्षे मग ( मार्ग ० ) वदि ३ सोमे श्रीमालज्ञातीय श्रे० ० जयतल भा० रतनादे तयोः सुते [न] पाल्ह भा० पाल्हणदे तेषां श्रा० द्वि० भार्या माऊ श्रीसंभवबिंबं का० प्र० सूरिभिः C ( १९२ ) एकतीर्थी संव० १४३४ वर्षे वैशाष ( ख ) वदि २ बुधे ओशवाल ज्ञा० महं छाह पुत्र देल्हा भार्या देल्हणदे पुत्राभ्यां काला केल्हाभ्यां पित्रोः पितृव्य हरपाल श्रेयसे श्रीमहावीरबिंबं कारितं प्र० ब्रह्माणीय श्री - हेमतिलकसूरिभिः ( १९३ ) पंचतीर्थी सं० १४३४ वर्षे वै ० वदि २ बुधे श्रीब्रह्माणगळे (च्छे) श्रीमालज्ञातीय पि० सलया मातृ देवल पितृव्य रनाईत प्रभृ० सु० देवसीहेन श्रीयुगादिदेवपंच ० का ० प्रति० सलषणपुरीय श्रीमुनिचंद्रसूरिभिः Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003986
Book TitleArbud Prachin Jain Lekh Sandohe Abu Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJayantvijay
PublisherVijaydharmsuri Jain Granthamala Ujjain
Publication Year1994
Total Pages762
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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