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________________ - विमलवसतिलेखाः । ७७ सिधपाल वि०(चि.) मावा वि(चि)रं मंत्री श्रीमाल वराहु रुगसाह भइरव गोइंद जयसिंह करमसी जात्रा गुरण साधै सफल || (२०७ ) .. संवत(त्) १५९७ वर्षे फागुण सुदि ५ श्रीआदिनाथकी जात्रा वीकम भार्या उवारी पुत्र भइरों जात्रा की ॥ शुभ ॥ (२०८) संघवी हाथी संघवी कुरा लषमा सचंती १७ जात्रा वार कीधी। (२०९) ॥ संवत(त्) १६१४ वर्षे मार्गसिर(शिर्ष) वदि ५ शुक्र मघा नक्षत्रे वृद्धिनाम्नि योगे शुभोदयशुभवेलाया(यां) श्रीतपागच्छे श्रीश्रीपाहल(ल्ह)णपुरापक्षीय पं० श्रीविनयप्रमोदगणिशिष्योपदेशेन । अहम्मदावादवासीय श्रीश्रीमालज्ञातीय सं० श्रीवमा उ(ओ)सवालज्ञातीय सं० सीहा उभयोरेकत्रीभूय । चतुर्विधश्रीसंघयुतो(ताभ्याम् ) श्रीअर्बुदाचले यात्रा कृता । सकलकुटं(टुं)ब युतौ(ताभ्याम् ) श्रीवमा श्रीसी(सिं)हाष्य(ख्ययोः) श्रीश्रीआदिनाथप्रसादात(त् ) ऋद्धिर्भवतु वृद्धिर्भवतुः मंगला(लं) भवतुः(तु) ॥ प० सहजे(ज)प्रमोदगणि विद्याकुलमुनि तथा प्र. आणंद सोजानी जात्रा सफ[ल].. Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003986
Book TitleArbud Prachin Jain Lekh Sandohe Abu Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJayantvijay
PublisherVijaydharmsuri Jain Granthamala Ujjain
Publication Year1994
Total Pages762
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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