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________________ महती जातिसेवा द्वितीय भाग [ ५१९ जबलपुर से सीधे खुरजा आए । स्टेशनपर श्रीमान् पंडित सेठ मेवाराम - जी बहुत से भाइयों के साथ उपस्थित थे। सेठजीका बहुत सन्मानसे स्वागत करके एक उम्दा कोठी में ठहराया। मुख्य २ बहुतसे भाई आए थे। सर्वका रानीबालोंने खान पानादिसे खूब ही सत्कार किया । ī ता. २८ को राय बहादुर सेठ अमोलकचंदजीके सभापतित्वमें सभा हुई जिसमें शिखरजी रक्षार्थ भारी चंदा के शिक्षरजीके रक्षार्थ करनेकी बात हुई। यह भी तय हुआ कि रुपया १०००० ) का दान | खर्च करके कुछ पहाड़को अपने कबजेमें कर लिया जाय इसके लिये २८ महाशयों की कमेटी बनी और चंदेकी सूची खोली गई । जब सेठजीने सर्वसे निवेदन किया कि आप लोग योग्य रकम कहें तब आध घंटे तक कोईने कुछ न कहा । लाला देवी सहाय फीरोजपुरबाले शिखरजीकी रक्षार्थ बड़े ही प्रयत्नशील थे | आपने सर्वसे पहले ५१००) कहे तथा अपने साथके लाला डालचंदजीकी ओर से ५५०० ) कहे । तब सेठ माणिकचंद पानाचंद बम्बईकी ओर से सेठजीने १००००) कहे, तब खुरजे वाले सेठ हरमुखराय अमोलकचंदने १५०००) लिखाए । लाला रूपचंद सहारनपुरने ५१००) कहे, लाला सुलतानसिंह दिहलीने ४१००) कहे | लाला ईश्वरीप्रसाद दिहलीने २१००) कहे । बाबू प्यारेलाल वकील दिहलीने १५०० ) कहे । लाला देवीसहाय सोहनलाल रावलपिंडीने २५०० ) कहे । इस प्रमाण चंदा शुरू हो गया। वहांसे सेठजी अजमेर गए । वहां रायबहादुर सेठ नेमीचंदजीने भी १५०००) भरे । | Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003979
Book TitleDanvir Manikchandra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMulchand Kishandas Kapadia
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year
Total Pages1016
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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