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________________ - हम्मीरायण केलउ मेलउ वेलउ साह, नयणउ नरबद नरसी साह, सरणाई अनरथ नउ मूल, राख्यां होसी माथा सूल ; ५६ महाजन समझाई राई, कइ जि मिलिवा करउ उपाई; आसण बयसण दीधा मान, तिहां दिवाड़इ फूल फल पान; ५७ नगर लोक महाजन सहू, किणि कारणि मिलि आयउ बहू; इणि नगरी दुख नहीं कुणइ, लील करइ चहुआणा तणइ ; ५८ तई कीधउ अपरीछ यउ काम, मीरां नइ वलि दीधा गाम; ढीली थका जे आव्या मीर, राखण जुगतउ नहीं हमीरः ५६ । दूहा ॥ अलावदीन तणइ घरइ, कीधउ एऊ विणास; तिणि राखण जुगतउ नहीं, इम बोलइ 'भांडउ' व्यासः . ६० विष वेली ऊगंतड़ी, नहे न खूटी जे (होइ); इणिवेली जे फल लागिस्यइ, देखइलउ सहूवइ कोइ ; ६१ ॥ चउपई ॥ इणि वेली जे फल लागिसई, थोड़ा दिन मांहि ते दीसिसई; तिहरा किसा हुस्यइ परिपाक, स्वादि जिस्या हुस्यइ ते राख ६२ तिय कथनइ राई कानि नविदीयउ, सीख देई महाजन घरिगयउ; तेय पूठइ जे बाहर हुती, अलूखांन करइ वीनति; ६३ रिणथंभोरि हमीरदे राउ, सरणे राख्या महिमासाह; तेह न मानइ कुणही आण, तेहना गढ नउ घणउ पराण; ६४ ६२ लागिसी ६३ तय Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003823
Book TitleHammirayan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBhanvarlal Nahta
PublisherSadul Rajasthani Research Institute Bikaner
Publication Year
Total Pages242
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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