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________________ दब्भसंथारगं दुरुहइ दुरिहित्ता] कयमालस्स देवस्स अट्ठमभत्तं पगिण्हइ पगिण्हित्ता पोसहसालाए पोसहिए बंभयारी [उम्मुक्कमणिसुवण्णे ववगयमालावण्णगविलेवणे निक्खित्तसत्थमुसले दब्भसंथारोवगए अट्ठमभतिए] कयमालगं देवं मणसीकरेमाणे-मणसीकरेमाणे चिट्ठइ तए णं तस्स भरहस्स रण्णो अट्ठमभत्तंसि परिणममाणंसि कयमालस्स देवस्स आसणं चलइ तहेव जाव वेयड्ढगिरिकुमारस्स नवरंपीइदाणं-इत्थीरयणस्स तिलग-चोद्दसं-भंडालंकारं कडगाणि य [तुडियाणि य वत्थाणि य] आभरणाणि य गेण्हइ गेण्हित्ता ताए उक्किट्ठाए तुरियाए जाव इमेयारूवं पीइदाणं पडिच्छइ पडिच्छित्ता कयमालं देवं सक्कारेइ सम्माणेइ सक्कारेत्ता सम्माणेत्ता पडिविसज्जेइ तए णं से भरहे राया पोसहसालाओ पडिणिक्खमइ पडिणिक्खमित्ता जेणेव मज्जणघरे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता णहाए कयबलिकम्मे जाव जेणेव भोयणमंडवे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता भोयणमंडवंसि सुहासणवरगए अट्ठमभत्तं पारेइ पारेत्ता भोयणमंडवाओ पडिणिक्खमइ पडिणिक्खमित्ता जेणेव बाहिरिया उवट्ठाणसाला जेणेव सीहासणे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता सीहासणवरगए पुरत्थाभिमुहे निसीयइ निसीइत्ता अट्ठारस सेणिप्पसेणीओ सद्दावेइ सद्देत्ता एवं वयासी-खिप्पामेव भो देवाणुप्पिया अट्टाहियं महामहिमं करेह करेत्ता मम एयमाणत्तियं पच्चप्पिणह तए णं ताओ अट्ठारस सेणि-प्पसेणीओ भरहेणं रण्णा एवं वृत्ताओ समाणीओ हट्ठ जाव अट्ठाहियं महामहिमं करेंति करेत्ता तमाणत्तियं पच्चप्पिणंति । [७६] तए णं से भरहे राया कयमालस्स देवस्स अट्ठाहियाए महामहिमाए निव्वत्ताए समाणीए सुसेणं सेणावइं सद्दावेइ सद्दावेत्ता एवं वयासी-गच्छाहि णं भो देवाणुप्पिया सिंधूए महानइए पच्चत्थिमिल्लं निक्खडं ससिंधसागरगिरिमेरागं समविसमणिक्खुडाणि य ओयवेहि ओयवेत्ता अग्गाइं वराई रयणाइं पडिच्छाहिं पडिच्छित्ता ममेयमाणत्तियं पच्चप्पिणाहि तते णं से सेणावई बलस्स नेया भरहे वासंमि विस्सुयजसे महाबलपरक्कमे महप्पा ओयंसी तेयंसी लक्खणजुत्ते मिलक्खुभासाविसारए चित्तचारुभासी भरहे वक्खारो-३ वासंमि निक्खुडाणं निण्णाणं य दुग्गमाण य दुक्खप्पवेसाणं य वियाणए अत्थसत्थकसले रयणं सणावई सुसेणे भरहेणं रण्णा एवं वुत्ते समाणे हद्वतुट्ठ-[चित्तमाणंदिए नंदिए पीइमणे परमसोमणस्सिए हरिसवसविसप्पमाणहियए] करयलपरिग्गहियं दसण्हं सिरसावत्तं मत्थए अंजलिं कट्ट एवं सामी तहत्ति आणाए विणएणं वयणं पडिसुणेइ पडिसुणेत्ता भरहस्स रण्णो अंतियाओ पडिणिक्खमइ पडिणिक्खमित्ता जेणेव सए आवासे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता कोडुबियपुरिसे सद्दावेइ सद्दावेत्ता एवं वयासी-खिप्पामेव भो देवाणुप्पिया आभिसेक्कं हत्थिरयणं पडिकप्पेह हय-गय-रह-पवर-जोहकालियं चाउरंगिणिं सेण्णं सण्णाहेत्तिकट्टु जेणेव मज्जणघरे तेणेव उवागच्छड़ उवागच्छित्ता मज्जणघरं अनुपविसइ अनुपविसिता पहाए कयबलिकम्मे कयकोउय-मंगल-पायच्छित्ते सन्नद्धबद्धवम्मिय-कवए उप्पीलियसरासणपट्टिए पिणद्धगेवेज्ज-बद्धआविद्धविमलवरचिंद्धपट्टे गहियाउहप्पहरणे अनेगगणनायगदंडनायग-[राईसर-तलवर माइंबिय-कोडुबिय-मंति-महामंति-गणग-दोवारिय-अमच्च-चेड-पीढ-मद्द-नगर-निगम-सेट्ठि-सेणावइ-सत्थवाहदूय-संधिवाल] सद्धिं संपरिवुड़े संकोरंटमल्लदामेणं छत्तेणं धरिज्जमाणेणं मंगलजयसद्दकयालोए मज्जणघराओ पडिणिक्खमइ पडिणिक्खमित्ता जेणेव बाहि-रिया उवट्ठाणसाला जेणेव आभिसेक्के हत्थिरयणे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता आभिसेक्कं हत्थिरयणं दुरुढे तए णं से सुसेणे सेणावई हत्थिखंधवरगए सकोरंटमल्लदामेणं छत्तेणं धरिज्जमाणेणं हय-गय-रह-पवरजोहकलियाए चाउरंगिणीए [दीपरत्नसागर संशोधितः] [34] [१८-जंबूद्दीवपन्नत्ति]
SR No.003735
Book TitleAgam 18 Jambudivpannatti Sattam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages122
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 18, & agam_jambudwipapragnapti
File Size2 MB
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