SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 23
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ तिभागे मज्झिमे तिभागे पच्छिमे तिभागे तीसे णं भंते समाए पढमे तिभाए भरहस्स वासस्स केरिस आगारभावपडोयारे भविस्सइ गोयमा बहुसमरमणिज्जे [भूमिभागे भविस्सइ से जहाणामए आलिंग-पुक्खरेइ वा जाव नानाविहपंचवण्णेहिं मणीहिं तणेहि य उवसोमिए तं जहा- कित्तिमेहिं चेव अकित्तिमेहिं चेव तीसे णं भंते समाए पढमे तिभागे भरहे वासे मणुयाणं केरिसए आगारभावपडोयारे भविस्सइ गोयमा सिं मणुयाणं छव्विहे संघयणे छव्विहे संठाणे बहुणि धणुसयाणि उद्धं उच्चत्तेणं जहण्णेणं संखेज्जाणि वासाणि उक्कोसेणं असंखेज्जाणि वासाणि आउयं पालेहिंति पालेत्ता अप्पेगइयानिरयगामी जाव करेहिंति] तीसे णं समाए पढमे तिभाए रायधम्मे जायते धम्मचरणे य वोच्छिज्जिस्सइ तीसे णं समाए मज्झिम-पच्छिमे तिभागेसु [भरहस्स वासस् केरिसए आगारभावपडोयारे भविस्सइ गोयमा बहुसमरमणिज्जे भूमिभागे भविस्सइ सो चेव गमो नेयव्वो नाणत्तं-दो धणुसहस्साइं उड्ढं उच्चत्तेणं तेसिं च मणुयाणं चउसट्ठि पिट्ठिकरडंगा चउत्थभत्तस्स आहारत्थे समुप्पज्जिस्सइ ठिई पलिओवमं एगूणासीइं इंदियाई सारक्खिस्संति संगोवेस्संति जाव देवलोगपरिग्गहिया णं ते मणुया पन्नत्ता समणाउसो तीसे णं समा वक्खारो-२ दोहिं सागरोवमकोडाकोडीहिं काले वीइक्कंते अनंतेहिं वण्णपज्जवेहिं जाव परिवड्ढेमाणे एत्थ णं सुसमाणामं समा काले पडिवज्जिस्सइ समणाउसो जंबुद्दीवे णं भंते दीवे आगमेस्साए उस्सप्पिणीए सुसमा सम उत्तमकट्ठपत्ताए भरहस्स वास्स केरिसए आगारभावपडोयारे भविस्सइ गोयमा बहुसमरमणिज्जे भूमिभागे भविस्सइ से जहानामए आलिंगपुक्खरेइ वा तं चेव जं सुसमसुसमाए पुव्ववण्णियं नवरंनाणत्तं चउधणुसहस्समूसिया एगे अट्ठावीसे पिट्ठिकरंडुकसए छट्टभत्तस्स आहारट्ठे चउसट्ठि राइंदियाइं सारक्खिस्संति दो पलिओवमाइं आऊ सेसं ते चेव तीसे णं समाए चउव्विहा मणुस्सा अनुसज्जिस्संति तं जहा- एका पउरजंधा कुसमा सुसमणा तीसे णं समाए तिहिं सागरोवमकोडाकोडीहिं काले वीइक्कंते अनंतेहिं वण्णपज्जवेहिं जाव परिवड्ढमाणे एत्थ णं सुसमसुसमाणामं समा काले पडिवज्जिस्सइ समणाउसो जंबुद्दीवे णं भंते दीवे भरहे वासे इमीसे उस्सप्पिणीए सुसमसुसमाए समाए उत्तमकट्ठपत्ताए भरहस्स वासस्स केरिसए आगारभावपडोयारे भविस्सइ गोयमा बहुसमरमणिज्जे भूमिभागे भविस्सइ जे जहानाम आलिंगपुक्खरेइ वा जाव नानाविहपंचवण्णेहिं मणीहिं तणेहि य उवसोभिए तं जहा- किण्हेहिं जाव सुक्किलेहिं] तहेव जाव छव्विहा मउस्सा अनुसज्जिस्संति [तं जहा- पम्हगंधा मियगंधा अममा तेतली सहा] सणिचारी । ० • बीओ वक्खारो समत्तो • मुनि दीपरत्नसागरेण संशोधितः सम्पादित्तश्च बीइओ वक्खारो समत्तो [] तइओ वक्खारो [५४] से केणद्वेणं भंते एवं वच्चइ-भरहे वासे भरहे वासे गोयमा भरहे णं वासे वेयड्ढस्स पव्वयस्स दाहिणेणं चोद्दसुत्तरं जोयणसयं एगारस य एगूणवीसइभाए जोयणस्स अबाहाए लवणसमुद्दस्स उत्तरेणं चोद्दसुत्तरं जोयणसयं एगारस य एगूणवीसइभाए जोयणस्स अबाहाए गंगाए महानईए पच्चत्थिमेणं सिंधूए महानईए पुरत्थिमेणंदाहिणड्ढभरहमज्झिल्लतिभागस्स बहुमज्झदेसभाए एत्थ णं विणीया नामं रायहाणी पन्नत्ता - पाईणपडीणायया उदीणदाहिणविच्छिण्णा दुवालसजोयणायामा [दीपरत्नसागर संशोधितः ] O [22] [१८-जंबूद्दीवपन्नत्ति]
SR No.003735
Book TitleAgam 18 Jambudivpannatti Sattam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages122
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 18, & agam_jambudwipapragnapti
File Size2 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy