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________________ सूरिए अनुपरियट्टइ तस्स णं मासस्स चरिमे दिवसे तिण्णि पयाइं चत्तारि य अंगुलाई पोरिसी भवइ हेमंताणं भंते पढमं मासं कई नक्खत्ता णेति गोयमा तिण्णि तं जहा- कत्तिया रोहिणी मिगसिरं कत्तिया चउद्दस रोहिणी पन्नरस मिगसिरं एग अहोरत्तं नेइ तंसि च णं मासंसि वीसंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अनुपरियट्टइ तस्स णं मासस्स जेसे चरिमे दिवसे तंसि च णं दिवसंसि तिण्णि पयाइं अट्ठ य अंगुलाई पोरिसी भवइ हेमंताणं भंते दोच्चं मासं कइ नक्खत्ता ऐति गोयमा चत्तारि नक्खत्ता ऐति तं जहामिगसिरं अद्दा पुणव्वसू पुस्सो मिगसिरं चउद्दस्स राइंदियाइं नेइ अद्दा अट्ठ नेइ पुणव्वसू सत्त राइंदियाई पुस्सो एगं राइंदियं नेइ तया णं चउव्वीसंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अनुपरियट्टइ तस्स णं मासस्स जेसे चरिमे दिवसे तंसि च णं दिवसंसि लेहवाइं चत्तारि पयाडं पोरिसी भवड हेमंताणं भंते तच्चं मासं कड़ नक्खत्ता ऐति गोयमा तिण्णि तं जहा- पुस्सो असिलेसा महा पुस्सो चोद्दस राइंदियाइं नेइ असिलेसा पन्नरस महा एक्कं तया णं वीसंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अनुपरियट्टइ तस्स णं मासस्स जेसे चरिमे दिवसे तंसि च णं दिवसंसि तिण्णि पयाई अटुंगुलाई पोरिसी भवइ हेमंताणं भंते चउत्थं मासं कड़ नक्खत्ता ऐति गोयमा तिण्णि नक्खत्ता तं जहा- महा पुव्वाफग्गुणी उत्तराफग्गुणी महा चउद्दस राइंदियाइं नेइ पुव्वाफग्गुणी पन्नरस राइंदियाइं नेइ उत्तराफग्गुणी एगं राइंदियं नेइ तया णं सोलसंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अनुपरियट्टइ तस्स णं मासस्स जेसे चरिमे दिवसे तंसि च णं दिवसंसि तिण्णि पयाइं चत्तारि य अंगुलाई पोरिसी भवइ गिम्हाणं भंते पढमं मासं कइ नक्खत्ता ऐति गोयमा तिण्णि नक्खत्ता ऐति तंजहा- उत्तराफग्गुणी हत्थो चित्ता उत्तराफग्गुणी चउद्दस राइंदियाइं नेइ हत्थो पन्नरस राइंदियाइं नेइ चित्ता एगं राइंदियं नेइ तया णं दुवालसंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अनुपरियट्टइ तस्स णं मासस्स जेसे चरिमे दिवसे तंसि च णं दिवसंसि लेहट्ठाइं तिण्णि पयाइं पोरिसी भवइ गिम्हाणं भंते दोच्चं मासं कइ नक्खत्ता ऐति गोयमा तिण्णि नक्खत्ता ऐति तं जहा- चित्ता साई विसाहा चत्ता चउद्दस राइंदियाइं नेइ साई पन्नरस राइंदियाइं नेइ विसाहा एगं राइंदिय नेइ विसाहा एगं राइंदियं नेइ तया णं अटुंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अनुपरियट्टइ तस्स णं मासस्स जेसे चरिमे दिवसे तंसि च णं दिवसंसि पयाई ___ अटुंगुलाई पोरिसी वक्खारो-७ भवइ गिम्हाणं भंते तच्चं मासं कइ नक्खत्ता ऐति गोयमा चत्तारि नक्खत्ता ऐति तं जहा- विसाहा अनुराहा जेट्ठा मूलो विसाहा चउद्दस राइंदियाइं नेइ अनुराहा अट्ठ राइंदियाइं नेइ जेट्ठा सत्त राइंदियाइं नेइ मूलो एक्कं राइंदियं नेइ तया णं चउरंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अनुपरियट्टइ तस्स णं मासस्स जेसे चरिमे दिवसे तंसि च णं दिवसंसि दो पयाइं चत्तारि य अंगलाई पोरिसी भवइ गिम्हाणं भंते चउत्थं मासं कइ नक्खत्ता ऐति गोयमा तिण्णि नक्खत्ता ऐति तं जहा- मूलो पुव्वासाढा उत्तरासाढा मूलो चउद्दस राईंदियाइं नेइ पुव्वासाढा पन्नरस राइंदियाइं नेइ उत्तरासाढा एगं राइंदियं नेइ तया णं वट्टाए समचउरंससंठाणसंठिए नग्गोहपरिमंडलाए सकायमणुरंगियाए छायाए सूरिए अनुपरियट्टइ तस्स णं मासस्स जेसे चरिमे दिवसे तंसि च णं दिवसंसि लेहट्ठाइं दो पयाइं पोरिसी भवइ एएसि णं पुव्ववण्णियाणं पयाणं इमा संगहणी [तं जहा]- | [३३३] जोगो देवय तारग्ग गोत्त संठाण चंदरविजोगो । कुल पुन्निम अवमंसा नेया छाया य बोद्धवा । [३३४] हिदि ससिपरिवारो मंदरबाहा तहेव लोगते । दीपरत्नसागर संशोधितः] [116] [१८-जंबूद्दीवपन्नत्ति]
SR No.003735
Book TitleAgam 18 Jambudivpannatti Sattam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages122
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 18, & agam_jambudwipapragnapti
File Size2 MB
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