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________________ [२६७] जंबुद्दीवे णं भंते मानुसुत्तरस्स पव्वयस्स जे चंदिम-सूरिय-गहगण-नक्खत्त-तारारूवा ते णं भंते देवा किं उड्ढोववण्णगा कप्पोववण्णगा विमाणोववण्णगा चारोववण्णगा चारद्विइया गइरइया गइसमावण्णगा गोयमा अंतो णं माणुसुत्तरस्स पव्वयस्स जे चंदिम-सूरिय जाव तारारूवा ते णं देवा नो उड्ढोववण्णगा नो कप्पोववण्णगा विमाणोववण्णगा चारोववण्णगा नो चारद्विइया गइरइया गइसमावण्णगा उड्ढीमुहकलंबुयापुप्फसंठाणसंठिएहिं जोयणसाहस्सिएहिं तावखेत्तेहिं साहस्सियाहिं वेउव्वियाहिं बाहिराहिं परिसाहिं महयाहय-नट्ट जाव दिव्वाइं भोगभोगाइं भुंजमाणा महया उक्किट्ठसीहनायबोलकलकलरवेणं अच्छं पव्वयरायं पयाहिणवत्तमंडलचारं मेरुं अनुपरियटॅति । [२६८] तेसि णं भंते देवाणं जाहे इंदे चुए भवइ से कहमियाणिं पकरेंति गोयमा ताहे चत्तारि पंच वा सामाणिया देवा तं ठाणं उवसंपज्जित्ताणं विहरंति जाव तत्थण्णे इंदे उववण्णे भवइ इंदट्ठाणे णं भंते केवइयं कालं उववाएणं विरहिए गोयमा जहण्णेणं एगं समयं उक्कोसेणं छम्मासे उववाएणं विरहिए बहिया णं भंते माणुसुत्तरस्स पव्वयस्स जे चंदिम-जाव तारारूवा तं चेव नेयव्वं नाणत्तंविमाणोववण्णगा नो चारोववण्णगा चारद्विइया नो गइरइया नो गइसमावण्णगा पक्किट्टसंठाणसंठिएहिं जोयणसयसाहस्सिएहिं तावखेत्तेहिं सयसाहस्सियाहिं वेउव्वियाहिं बाहिराहिं परिसाहिं महयाहयणट्ट-गीय-जाव भुंजमाणा सुहलेसा मंदलेस्सा मंदयवलेसा चित्तंतरलेसा अण्णोण्णसमोगाढाहिं लेसाहिं कूडाविव ठाणठिया सव्वओ समंता ते पएसे ओभासेंति उज्जोवेंति पभासेंति तेसि णं भंते देवाणं जाहे इंदे चुए भवइ से कहमियाणि पकरेंति जाव जहण्णेणं एक्कं समयं उक्कोसेणं छम्मासा | वक्खारो-७ [२६९] कइ णं बंते चंदमंडला पन्नत्ता गोयमा पन्नरस चंदमंडला पन्नत्ता गोयमा जंबुद्दीवेणं भंते दीवे केवइयं ओगाहित्ता केवइया चंदमंडला पन्नत्ता गोयमा जंबुद्दीवे दीवे असीयं जोयणसयं ओगाहित्ता पंच चंदमंडला पन्नत्ता लवणे णं भंते पुच्छा गोयमा लवणे णं समुद्दे तिण्णि तीसे जोयणसए ओगाहित्ता एत्थ णं दस चंदमंडला पन्नत्ता एवामेव सपव्वावरेणं जंबुद्दीवे दीवे लवणे य समद्दे पन्नरस चंदमंडला भवंतीतिमक्खायं । [२७०] सव्वब्भंतराओ णं भंते चंदमंडलाओ केवइयं अबाहाए सव्वबाहिरए चंदमंडले पन्नत्ते गोयमा पंचदसत्तरे जोयणसए अबाहाए सव्वबाहिरए चंदमंडले पन्नत्ते ।। [२७१] चंदमंडलस्स णं भंते चंदमंडलस्स य एस णं केवइयं अबाहाए अंतरे पन्नत्ते गोयमा पणतीसं-पणतीसं जोयणाइं तीसं च एगसद्विभाए जोयणस्स एगसट्ठिभागं च सत्तहा छेत्ता चत्तारि चुण्णियाभाए चंदमंडलस्स-चंदमंडलस्स अबाहाए अंतरे पन्नत्ते । [२७२] चंदमंडले णं भंते केवइयं आयाम-विक्खंभेणं केवइयं परिक्खेवेणं केवइयं बाहल्लेणं पन्नत्ते गोयमा छप्पन्नं एगसद्विभाए जोयणस्स आयाम-विक्खंभेणं तं तिगणं सविसेसं परिक्खेवेणं अट्ठावीसं च एगसद्विभाए जोयणस्स बाहल्लेणं । [२७३] जंबुद्दीवे णं भंते दीवे मंदरस्स पव्वयस्स केवइयं अबाहाए सव्वब्भंतरए चंदमंडले पन्नत्ते गोयमा चोयालीसं जोयणसहस्साइं अट्ठ य वीसे जोयणसए अबाहाए सव्वब्भंतरे चंदमंडले पन्नत्ते जंबद्दीवे णं भंते दीवे मंदरस्स पव्वयस्स केवइयं अबाहाए अब्भंतराणंतरे चंदमंडले पन्नत्ते गोयमा चोयालीसं जोयणसहस्साइं अट्ठ य छप्पन्ने जोयणसए पणवीसं च एगसहिभाए जोयणस्स एगसहिभागं च सत्तहा छेत्ता चत्तारि चुण्णियाभाए अबाहाए अब्भंतराणंतरे चंदमंडले पन्नत्ते जंबुद्दीवे णं भंते दीवे [दीपरत्नसागर संशोधितः] [105] [१८-जंबूद्दीवपन्नत्ति]
SR No.003735
Book TitleAgam 18 Jambudivpannatti Sattam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages122
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 18, & agam_jambudwipapragnapti
File Size2 MB
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