________________ अट्ठासीति खलु गहा नेतव्वा आणुपुव्वीए / . वीसइमं पाहुई समत्तं . [212] इह एस पाहुडत्था अभव्वजणहिययदुल्लहा इणमो / उविकत्तिता भगवती जोतिसरायस्स पन्नत्ती / [213] एस गहितावि संति थद्धे गारविय-माणि-पडीणीए / अबहुस्सुए णं देया तव्विवरीते भवे देया / [214] सद्धा-धिति-उट्ठाणुच्छाह-कम्म-बल-वीरिय-पुरिसकारेहिं / जो सिक्खिओवि संतो अभायणे पक्खिवेज्जाहि / [215] सो पयवण-कुल-गण-संधबाहिरो नाणविणयपरिहीणो / अरहंतथेरगणहरमरं किर होति वोलीणो / [216] तम्हा धिति-उट्ठाणुच्छाह-कम्म-बल-वीरियसिक्खियं नाणं / धारेयव्वं नियमा ण य अविणीएस् दायव्वं / [217] वीरवरस्स भगवतो जरमरणकिलेसदोसरहियस्स / वंदामि विणयपणतो सोक्खुप्पाए सदा पाए / [218] इइ संगहणी गाहा / 0 मुनि दीपरत्नसागरेण संशोधितः सम्पादित्तश्च चंदपन्नत्ति उवंगं समत्तं . 17 चंदपन्नत्ती- छठं उवंगं समत्तं Proof correction is not done दीपरत्नसागर संशोधितः] [65] [१७-चंदपन्नत्ति