SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 52
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ असुरकमाररण्णो तओ परिसाओ पन्नत्ताओ समिया चंडा जाया अभिंतरिया समिया मज्झिमिया चंडा बाहिरिया जाया । [१५७] कहि णं भंते उत्तरिल्लाणं असुरकुमाराणं भवणा पन्नत्ता जहा- ठाणपदे जाव बली एत्थ वइरोयणिंदे वइरोयणराया परिवसति जाव विहरति बलिस्स णं भंते वइरोयणिंदस्स वइरोयणरण्णो कति परिसाओ पन्नत्ताओ गोयमा तिण्णि परिसाओ पन्नत्ताओ तं जहा- समिया चंडा जाया अभिंतरिया समिया मज्झिमिया चंडा बाहिरिया जाया बलिस्स णं भंते वइरोयणिंदस्स वइरोयणरण्णो अभिंतरियाए परिसाए कति देवसहस्सा पन्नत्ता मज्झिमियाए परिसाए कति देवसहस्सा पन्नत्ता जाव बाहिरियाए परिसाए कति देविसया पन्नत्ता गोयमा बलिस्स णं वइरोयणिंदस्स वइरोयणरण्णो अभिंतरियाए परिसाए वीसं देवसहस्सा पन्नत्ता मज्झिमियाए परिसाए चउवीसं देवसहस्सा पन्नत्ता बाहिरियाए परिसाए अट्ठावीसं देवसहस्सा पन्नत्ता अभिंतरियाए परिसाए अद्धपंचमा देविसया पन्नत्ता मज्झिमियाए परिसाए चत्तारि देवसया पन्नत्ता बाहिरियाए परिसाए अद्भुट्ठा देविसया पन्नत्ता बलिस्स ठितीए पुच्छा जाव बाहिरियाए परिसाए देवीणं केवतियं कालं ठिती पन्नत्ता गोयमा बलिस्स णं वइरोयणिंदस्स वइरोयणरण्णो अभिंतरि-याए परिसाए देवाणं अद्भुट्ठ पलिओवमा ठिती पन्नत्ता मज्झिमाए परिसाए तिण्णि पलिओवमाइं ठिती पन्त्ता बाहिरियाए परिसाए देवाणं अड्ढाइज्जाइं पलिवओवमाइं ठिती पन्नत्ता अभिंतरियाए परिसाए देवीणं अड़ढाइज्जाइं पलिओवमाइं ठिती पन्नत्ता मज्झिमियाए परिसाए देवीणं दो पलिओवमाइं ठिती पन्नत्ता बाहिरियाए देवीणं दिवड्ढं पलिओवमं ठिती पन्नत्ता सेसं हा- चमरस्स असुरिंदस्स असुरकुमाररण्णो। ___ [१५८] कहि णं भंते नागकुमाराणं देवाणं भवणा पन्नत्ता जहा- ठाणपदे जाव दाहिणिल्लावि पुच्छियव्वा जाव धरणे इत्थ नागकुमारिंदे नागकुमारराया परिवसति जाव विहरति धरणस्स णं भंते नागपडिवत्ति-३ कुमारिंदस्स नागकुमाररण्णो कति परिसाओ पन्नत्ताओ गोयमा तिण्णि परिसाओ ताओ चेव जहाचमरस्स धरण्णस णं भंते नागकुमारिंदस्स नागकुमाररण्णो अभिंतरियाए परिसाए कति देवसहस्सा पन्नत्ता जाव बाहिरियाए परिसाए कति देवीसया पन्नत्ता गोयमा धरणस्स णं नागकुमारिंदस्स नागकुमाररण्णो अभिंतरियाए परिसाए सद्धिं देवसहस्साई मज्झिमियाए परिसाए सत्तरि देवसहस्साइं बाहिरियाए असीतिदेवसहस्साई अभिंतरियाए पिरसाए पन्नत्तरं देविसतं पन्नत्तं मज्झिभियाए परिसाए पन्नासं देविसतं पन्नत्तं बाहिरियाए परिसाए पणवीसं देविसतं पन्नत्तं धरणस्स णं नागकुमारिंदस्स नागकुमाररण्णो अभिंतरियाए परिसाए देवाणं केवतियं कालं ठिती पन्नत्ता मज्झिमियाए परिसाए देवाणं केवतियं कालं ठिती पन्नत्ता बाहिरियाए परिसा देवाणं केवतियं कालं ठिती पन्नत्ता अभिंतरियाए परिसाए देवीणं केवतियं कालं ठिती पन्नत्ता मज्झिमियाए परिसाए देवीणं केवतियं कालं ठिती पन्नत्ता बाहिरियाए परिसाए देवीणं केवतियं कालं ठिती पन्नत्ता गोयमा धरणस्स णं नागकुमारिंदस्स नागकुमाररण्णो अब्बिंतरियाए परिसाए देवाणं सातिरेगं अद्धपलिओवमं ठिती पन्नत्ता मज्झिमियाए परिसाए देवाणं अद्धपलिओवमं ठिती पन्नत्ता बाहिरियाए परिसाए देवाणं देणं अद्धपलिओवमं ठिती पन्नत्ता अभिंतरियाए परिसाए देवीणं देसूणं अद्धपलिओवमं ठिती पन्नत्ता मज्झिमियाए परिसाए देवीणं सातिरेगं चउब्भागपलिओवमं ठिती पन्नत्ता बाहिरियाए परिसाए देवीणं चउभागपलिओवमं ठिती पन्नत्ता अट्ठो जहा चमरस्स कहि णं भंते उतरिल्लाणं नगाकुमाराणं भवणा पन्नत्ता जहा- ठाणपदे जाव विहरति दीपरत्नसागर संशोधितः] [51] [१४-जीवाजीवाभिगम]
SR No.003727
Book TitleAgam 14 Jivajivabhigam Taiam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2012
Total Pages152
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 14, & agam_jivajivabhigam
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy