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________________ केसी गोयमउ निच्चं तंमि आसि समागमे । सुय सील समुक्कारसो मह थ्थथ्थ विणिछु॥८८॥तोसिया परिसासव्या समग्गंतु समुवठिया । संथुया ते पसीयंतु भगवं केसि गोयमो तिबेमि ॥ ८९ ॥ . ॥ इति केसि गोयम नाम झयणं तेविसमं सम्मत्तं ॥ २३ ॥ अध्ययन २४. समिति (पांच समिति अने त्रण अठ्ठ प्पवयण मायाओ समिई गुत्ती तहेवय । पंचेवय समिइओ तओ गुत्तीओ आहिया ॥१॥इरिया भासे सणादाणे उच्चारे सामईडय । मण गती वय गत्ती कायगत्तीय अठ्ठमा ॥२॥ .ते नगराने विष केशि अने गौतमनो समागम थवाथी ज्ञान अने चारित्र [ शील नो उत्कर्ष थयो * अने तत्वादि अगत्यना विषयोनो निर्णय थयो [८८. सकळ सभा अति प्रसन्न थइ अने सम्यक मार्गने विषे उपस्थित( सावधान )थइ. अने सौ कोइ केशि अने गौतमनी प्रशंसा करवा लाग्या के 'ते ज्ञानवंत भगवंतो आपणा उपर प्रसन्न रहो.'(८९), * त्रेवीसमें अध्ययन संपूणे. * ® अध्ययन २४. ७ श्री जिन शासनने विष समिति अने गप्ति मळीने अप्र प्रवचन कहां छे. तेमां पांच समिति अने त्रण गप्ति जे. (१), पांच समिति नीचे प्रमाणे छ :-(१) इया-समिति, (२) भाषा-समिति, (३) एषणा-समिति, (४) आदान-समिति, अने (५) उच्चार*मिनि. प्रण गुप्ति नीचे प्रमाणे छे :-[१] मनो-गुप्ति, [२] वचन-गुप्ति अने [३] काय गुप्ति. (२). * Brought to eminenee. 4001 Jain Education Intematonal For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003693
Book TitleAgam 43 Mool 04 Uttaradhyayan Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMehta Mohanlal Damodar
PublisherMehta Mohanlal Damodar
Publication Year
Total Pages352
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, & agam_uttaradhyayan
File Size20 MB
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