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________________ छठे विकल्प करि २ भांगा१००. अथवा त्रिण वालु इक धूमा, एक तमा अघरास । अथवा त्रिण वालु इक धूमा, एक तमतमा वास । हिवै वालु तम थी १ भांगो ते ५ विकल्प करि कहै छै१०१.अथवा इक वालु इक तमा, तीन तमतमा पाय । अथवा इक वालु बे तमा, दोय तमतमा जाय । १०२. अथवा बे वालु इक तमा, दोय तमतमा होय । अथवा इक वालु त्रिण तमा, एक तमतमा जोय । एवं वालु थी ६ भांगा, ते ६ विकल्प करि ३६ भांगा कह्या । १०३. अथवा बे वालु बे तमा, एक सप्तमी माय । अथवा त्रिण वालु इक तमा, एक तमतमा जाय ।। हिवं पंक थी तीन भांगा। ते पंक धूम थी २, अन पंक तम थी १ -एवं तीन । पंक थी ६ विकल्प करि अठार भांगा हुवै । प्रथम पंक धूम थी २ भांगा, ते ६ विकल्प करि कहै छै प्रथम विकल्प करि २ भांगा१०४. अथवा एक पंक एक धमा, तीन तमा कहिवाय । अथवा एक पंक इक धूमा, तीन तमतमा माय ।। दूजे विकल्प करि २ भांगा१०५. अथवा एक पंक बे धूमा, दोय तमा दुखस्थान । अथवा एक पंक बे धूमा, दोय तमतमा जान ।। तीजै विकल्प करि २ भांगा१०६. अथवा दोय पंक इक धमा, दोय तमा अघराश। अथवा दोय पंक इक धूमा, दोय तमतमा वास । चउथै विकल्प करि २ भांगा१०७. अथवा एक पंक त्रिण धमा, एक तमा अवलोय । अथवा एक पंक त्रिण धूमा, एक तमतमा होय ।। पांचवें विकल्प करि २ भांगा१०८.अथवा दोय पंक बे धूमा, एक तमा दुखराश । अथवा दोय पंक बेधूमा, एक तमतमा तास ॥ छठ विकल्प करि २ भांगा१०६. अथवा त्रिण पंके इक धमा, एक तमा में जंत । अथवा त्रिण पंके इक धमा, एक तमतमा हंत ।। हिवै पंक तम थी एक भांगो ६ विकल्प करि कहै छ११०. अथवा एक पंक एक तमा, त्रिण तमतमा मांय । अथवा एक पंक दोय तमा, दोय तमतमा पाय ।। १११.अथवा दोय पंक इक तमा, दोय तमतमा होय । अथवा एक पंक त्रिण तमा, एक तमतमा जोय । ११२. अथवा दोय पंक दोय तमा, एक तमतमा जंत। अथवा त्रिण पंके इक तमा, एक तमतमा हुंत ॥ एवं पक थी ३ भांगा, ते ६ विकल्प करि १८ भांगा ह्या । हिवं धूम थी एक भांगो हुवं, ते ६ विकल्प करि कहै छ ८० भगवती जोड़ Jain Education Intemational For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003619
Book TitleBhagavati Jod 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTulsi Acharya, Mahapragna Acharya
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year1990
Total Pages490
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, & agam_bhagwati
File Size14 MB
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